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फ्लू पर सरकार ने जारी किए नए दिशा निर्देश

फ्लू पर सरकार ने जारी किए नए दिशा निर्देश

देश में स्वाइन फ्लू के नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा नहीं होनी चाहिए और शिक्षकों द्वारा प्रत्येक छात्र में इस रोग के लक्षणों की जांच भी अनिवार्य की गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को वरिष्ठ संपादकों के एक समूह को बताया कि ये दिशा निर्देश अगले कुछ दिनों में जारी हो सकते है। आजाद ने कहा कि सुबह की सभाएं इस वायरस के संक्रमण के लिहाज से अधिक जोखिम वाली हो सकती हैं क्योंकि इसमें छात्र एक दूसरे काफी करीब होते हैं। उन्होंने कहा कि यह अनिवार्य किया जा रहा है कि प्रत्येक शिक्षक फ्लू के लक्षणों की पड़ताल के लिए हर छात्र की सीट तक जाएं और पहचान होने पर उस बच्चे को तत्काल एक सप्ताह के लिए घर भेज दिया जाए।
   
इस बीमारी के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए आजाद ने कहा कि अगले पांच से सात महीनों के दौरान एक नया टीका बनने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्षों पूराने महामारी अधिनियम की जगह एक नए कानून को लाने की तैयारी की जा रही है जिसमें अन्य महामारी वाले रोगों को शामिल किया जाएगा। देश में अब तक स्वाइन फ्लू से 28 रोगियों की मौत हो चुकी है और 1700 से अधिक लोगों में इसकी पुष्टि हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर शीघ्र ही 24 और थर्मल स्कैनर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में और 6 निजी प्रयोगशालों में स्वाइन फ्लू के नमूनों की जांच की सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएगी अभी तक यह केवल तीन में ही मिल रही है । देश में सरकार के तहत इस समय 18 प्रयोगशालाओं में इस रोग के नमूनों की जांच की जा रही है।

रक्षा मंत्रालय ने भी कुछ प्रयोगशालाओं को इस रोग के नमूनों की जांच के लिए चुना है। स्वास्थ्य मंत्रालय भी इनमें शामिल होने की कोशिश कर रहा है। आजाद ने कहा कि देश में स्वाइन फ्लू के लिए जो त्वरित दल स्थापित किया गया था वह मंगलवार तक अपनी रिपोर्ट दे देगा।

इसी बीच पता चला है कि देश में जो शहर इस रोग से सबसे अधिक प्रभावित है जैसे पुणे, मुंबई और हैदराबाद से लोग भय के कारण गांवों की ओर पलायन कर रहे है जिसके कारण वहां पर भी यह रोग फैल सकता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सभी राज्य सरकारों से इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

आजाद ने कहा कि स्वाइन फ्लू रोग को काफी हद तक रोका जा चुका है लेकिन इसे स्थायी रूप से नियंत्रण में लाने के लिए हमारे पास कोई जादूई छड़ी नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय इसे रोकने के लिए अपेक्षा से अधिक काम कर चुका है और कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में अब तक स्वाइन फ्लू से जितने भी रोगी मरे है वे या तो इलाज के लिए देरी से अस्पताल पहुंचे या फिर वे किसी न किसी लंबी बीमारी से पीड़ित रहे थे और उनकी प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो चुकी थी।

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