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पटना होकर गुजरने वाली तीसरी लाइन में कई पेंच

पटना मेन लाइन पर ट्रेनों के बढ़ते बोझ से निजात दिलाने के लिए तीसरी लाइन की योजना तो बनी लेकिन अब उसमें कई पेंच सामने आने लगे हैं। कई व्यावहारिक समस्या देखकर अब यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी हो रही है। बताया जाता है कि रेलवे ने अपने स्तर से जो सर्वे किया है उसने दिल्ली तक के होश उड़़ा दिए हैं। रिपोर्ट यह बताती है कि फिलहाल तीसरी लाइन का निर्माण संभव नहीं है।

मुगलसराय से झझ तक ट्रेनों की दौड़ ने रेलवे लाइन की परेशानी काफी बढ़ा दी है। ट्रैक पर काफी बोझ बढ़ गया है। इस समय ट्रैक की मौजूदा क्षमता से 180 फीसदी अधिक ट्रेनों का परिचालन इस रेल लाइन से होता है। इसके करण ट्रेनों को समय पर चलाने से लेकर नई गाडिय़ों को शुरू करने में कई तरह की समस्या उत्पन्न हो रही है। इसी समस्या को दूर करने के लिए पहले बक्सर से मोकामा के बीच 207 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाने की योजना तैयार की गई। इसमें अधिक समय और धनराशि के कारण बाद में तीसरी लाइन को घटाकर आरा-फतुहा के बीच बनाने की योजना तैयार की गई। 71 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 250 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान था।

अब रेलवे की सबसे बड़ी परेशानी ट्रैक के निकट के जमीन को लेकर है। वहां कई पक्के कंस्ट्रक्शन हैं और बड़ी संख्या में घर तक बन गए हैं। लिहाजा तीसरी लाइन बिछाने में रेलवे को मेट्रो की तर्ज पर कम से कम दो दर्जन बड़े पुल वाले ट्रैक बनाने होंगे जो फिलहाल संभव नहीं। यही नहीं इसके लिए बड़ी धनराशि भी खर्च करनी होगी और इसके लिए योजना आयोग भी तैयार नहीं होने वाला।

पूर्व मध्य रेलवे के तत्कालीन जीएम गिरीश भटनागर ने तीसरी लाइन की रिपोर्ट की समस्या का अध्ययन किया था। उस समय श्री भटनागर ने कहा था कि ट्रैक के निकट का निर्माण तीसरी लाइन की सबसे बड़ी बाधा है और उसे दूर करने करने के लिए कई पुलो की जरूरत पड़ेगी और यह बड़ी परेशानी हो सकती है। इस समय ट्रैक के दोनों ओर इतनी जमीन नहीं है कि तीसरी लाइन का निर्माण किया जा सके।

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  • Web Title:पटना होकर गुजरने वाली तीसरी लाइन में कई पेंच