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युद्धबंदियों की मुक्ति को घूम रहा एक चितेरा

युद्ध खत्म हो जाने के साथ ही बंदी बनाए गए सैनिकों की कहानी भी जेल की सलाखों के पीछे गुम हो जाती है। अधिकांश युद्धबंदी जेल में ही अपनी जिंदगी पूरी कर लेते हैं। बहुत कम लोगों को रिहाई नसीब हो पाती है। ऐसे युद्धबंदियों की व्यथा को पोस्टरों के जरिए दुनिया के सामने उजागर करने में एक चितेरा लगा हुआ है। इन पोस्टरों की 107वीं प्रदर्शनी का आयोजन मंगलवार को बार एसोसिएशन के सभागार में किया जाएगा।


बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवदत त्यागी और सचिव लोकेश शर्मा ने बताया कि युद्धबंदियों की व्यथा पर आधारित एक पोस्टर प्रदर्शनी मंगलवार को आयोजित होगी। हीरालाल यादव के द्वारा आयोजित होने वाली यह 107वीं प्रदर्शनी है। विक्रांत शर्मा एडवोकेट ने बताया कि हीरालाल युद्धबंदियों की व्यथा देखकर काफी व्यथित हुए। इसके बाद उन्होंने इनकी दयनीय हालत को दुनिया के सामने उजागर करने का बीड़ा उठाया। इसके लिए देश-विदेश का भ्रमण कर युद्धबंदियों से संबंधित पोस्टर इकट्ठा किए। हीरालाल यादव ने बताया कि युद्ध के दौरान काफी समय में सैनिक बंदी बनाए जाते हैं।

वह अपने-अपने देशों की ओर से लड़ते हैं। ऐसे में युद्ध खत्म होने के साथ ही उन्हें भी रिहा कर देना चाहिए। लेकिन अधिकांश बंदी अपनी पूरी जिंदगी कैदखानों में गुजार देते हैं। हर देश में दुश्मन देश के बहुत से युद्धबंदी कैद होते हैं। जिन्हें रिहा किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर वह देश-विदेश में 106 जगह पर पोस्टर प्रदर्शन लगा चुके हैं। अब मानव मित्र संस्था की ओर से गाजियाबाद में यह पोस्टर प्रदर्शनी लगाकर युद्धबंदियों की रिहाई की मांग की जा रही है।

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