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समलैंगिकता संबंधी याचिका पर केंद्र को नोटिस

समलैंगिकता संबंधी याचिका पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को योग गुरु बाबा रामदेव के एक शिष्य और एक ईसाई संगठन की उन याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया, जिनमें वयस्कों के बीच पारस्परिक सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को वैध घोषित किए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई है।

प्रधान न्यायाधीश केजी बालकृष्णन की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को 14 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया, जब उसके द्वारा इसी मामले से संबंधित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई किए जाने की संभावना है। न्यायालय ने केंद्र से सुनवाई की अगली तारीख तक जवाब दायर करने के लिए कहा।

शीर्ष अदालत ने यह नोटिस बाबा रामदेव के शिष्य एसके तिजारावाला तथा क्रिश्चियन एपोस्टोलिक चर्चेज एलायंस की ओर से दायर याचिकाओं पर जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पूर्व 20 जुलाई को यह कहते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था कि वह मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार करेगा। न्यायालय पूर्व में ज्योतिषी सुरेश कुमार कौशल की याचिका पर भी जवाब दायर करने के लिए केंद्र को नोटिस जारी कर चुका है।

गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन और उन अन्य को भी नोटिस जारी किए गए थे जो उच्च न्यायालय के समक्ष पार्टी थे। कौशल ने दिल्ली उच्च न्यायालय के दो जुलाई के उस फैसले को दरकिनार करने की मांग की थी, जिसमें वयस्कों के बीच एकांत में पारस्परिक सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को वैध घोषित किया गया था । इस फैसले से पूर्व समलैंगिक संबंध ऐसे अपराध की श्रेणी में थे जिनमें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

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