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पर्यटन के प्रति उदासीन है उत्तराखण्ड सरकार

उत्तराखण्ड को राज्य बने नौ साल बीत चुके हैं और इस दौरान राज्य ने पांच मुख्यमंत्री देखे हैं लेकिन वहां पर्यटन को लेकर उदासीनता दिखाई देती है।

देशभर में अपनी खूबसूरती को लेकर मशहूर टिहरी बांध में झील बने हुए पांच साल हो गए, लेकिन सरकार ने पर्यटकों को यहां खींचने के लिए कोई ऐसा उपाय नहीं किया, जिससे इस क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व झील विकास प्राधिकरण का गठन किया था, जिसका उददेश्य टिहरी और उसके आस पास के क्षेत्रों में पर्यटन का खाका तैयार करने का था। पर अभी तक उस योजना का भी कोई लाभ इस क्षेत्र में कहीं दिखाई नहीं दे रहा।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार को टिहरी बांध से उत्पादित बिजली से सालाना करीब 1200 करोड़ एपये की आमदनी होती है। अगर सरकार इसपर थोड़ा सा भी ध्यान दे दे, तो अनुमानत: राज्य सरकार को इससे चौगुनी आमदनी हो सकती है।

इस संदर्भ में टिहरी जल विकास निगम के महाप्रबंधक एएल शाह का कहना है कि बांध की झील पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन सकती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहल करे तो उनका विभाग भी इस योजना में सहयोग कर सकता है।

राज्य के पर्यटन मंत्री मदन कौशिक से इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार शीघ्र ही इस दिशा में सार्थक और सकारात्मक पहल करने जा रही है। कौशिक का मानना है कि पर्यटन की दृष्टि से टिहरी बांध की झील राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

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