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मानवाधिकार मंत्रालय का लेना-देना नहीं: पाक

मानवाधिकार मंत्रालय का लेना-देना नहीं: पाक

पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के मंत्री मुमताज आलम गिलानी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट मौत की सजा प्राप्त भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की पुनर्विचार याचिका खारिज कर चुका है और उनका मंत्रालय इस मामले में कुछ नहीं कर सकता है, अलबत्ता अब राष्ट्रपति ही उसे क्षमादान दे सकते हैं।

गिलानी ने रविवार की रात उनसे मिलने गए भारतीय पत्रकारों से बातचीत में यह टिप्पणी की। गिलानी ने कहा कि अब सिर्फ राष्ट्रपति ही सरबजीत की दया याचिका स्वीकार कर सकते हैं। उनके मंत्रालय का इस मामले से अब कोई लेना-देना नहीं रह गया है।

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जून में उसकी पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए उसकी मौत की सजा को बरकरार रखा था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उसने सरबजीत मामले का गहन अध्ययन किया और निचली अदालत द्वारा उसे दी गई फांसी की सजा पर पुनर्विचार करने का उसे कोई आधार नहीं मिला।

वर्ष 1990 में लाहौर और मुल्तान में सिलसिलेवार बम विस्फोटों में कथित रूप से लिप्त सरबजीत को फांसी की सजा दी गई है। सरबजीत के परिजनों का कहना है उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। सरबजीत को एक अप्रैल को फांसी सजा मिलनी थी, लेकिन प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी के हस्तक्षेप के बाद उसकी सजा अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है।

मानवाधिकार मामलों के मंत्री ने भारत और पाकिस्तान के बीच ठप पड़ी समग्र वार्ता की बहाली के लिए दोनों देशों की जनता के बीच संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

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