DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

‘डंपिंग यार्ड’ ने मिटाया ग्रीन बेल्ट का नामोनिशान

ग्रीन बेल्ट में लगने वाले कूड़े के ढेर व उससे फैलने वाली गंदगी व असहनीय बदबू से सेक्टर-51 ई-ब्लॉक निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। लाखों रुपए खर्च करके यहां घर बनाने वालों की तमाम कोशिशों के बावजूद अथॉरिटी के आला-अफसरों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही जबकि सेक्टरवासी बीमारियों को दावत देती, गंदगी-कूड़े से भरी ग्रीन बेल्ट को झेलने पर मजबूर हैं।

सेक्टरवासी संदीप जैन व दिलीप सिंह चौहान सहित अन्य लोगों ने बताया कि वे अथॉरिटी व हेल्थ डिपार्टमेंट को कई बार पत्र लिखने के साथ हर जगह अपनी शिकायत लेकर जा चुके हैं पर इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। कई महीनों से आसपास के गांवों और सेक्टरों का सारा कूड़ा इस ग्रीन बैल्ट में धड़ल्ले से डाला जा रहा है, जिसके बारे में की गईं अनगिनत शिकायतों और जून महीने में ‘हिन्दुस्तान’ में छपी खबर के बाद पिछले महीने, हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से उस गड्ढे को बंद कराने के लिए ट्रकों में कूड़ा-करकट भरकर यहां लाकर डाला जाने लगा।


लेकिन आठ-दस दिनों तक लगातार कूड़ा डालते रहने के बाद पूरी तरह गड्ढे को बंद किए बिना ही अधूरा छोड़ दिया गया, इससे लोगों की समस्या कम होने की बजाए और बढ़ गई है लेकिन अधिकारी एक दूसरे पर डालकर मामले से हाथ झाड़ रहे हैं।

एक बार फिर सेक्टरवासियों ने छह अगस्त को डीसीईओ एनपी सिंह को एक पत्र के माध्यम से डम्पिंग यार्ड बने ग्रीन बेल्ट की समस्या को हल किए जाने की प्रार्थना की है। इस बारे में एमएल शर्मा (हेल्थ) एपीई-2, का कहना है कि इसमें हम क्या कर सकते हैं, जो वहां कूड़ा डाल रहा है उसे रोको, हमने अपना काम कर दिया है और अब जो भी समस्या है उसके बारे में अथॉरिटी के अफसर जानें।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:‘डंपिंग यार्ड’ ने मिटाया ग्रीन बेल्ट का नामोनिशान