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घातक है ड्रोन

क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या और लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर आतंकी हमले के मास्टरमाइंड, खूंखार तालिबानी कमांडर बैतुल्ला मेहसूद को हाल में किसने मारा? जी नहीं, बैतुल्ला का सफाया पाकिस्तान या अमेरिका के किसी फौजी दस्ते या कमांडर के हाथों नहीं, बल्कि अत्याधुनिक मानव-रहित युद्धक विमान ‘ड्रोन’ के अचूक निशाने की वजह से संभव हो सका। दहशत के सौदागरों को भी खौफ़जदा कर देने वाली ये खूंखार हमलावर मशीन ‘ड्रोन’, आखिर है क्या और कैसे काम करती है। इसके बारे में सब कुछ बता रहे हैं - अनुराग मिश्र
 
मौजूदा समय में ड्रोन हमला सुर्खियों में है। आधुनिक युद्धकला में ड्रोन्स का इस्तेमाल आम होता जा रहा है। गौरतलब है कि तालिबान प्रमुख बैतुल्ला महसूद भी ड्रोन हमले में ही मारा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि बैतुल्ला पर हवाई हमला किया गया था, लेकिन इस हमले की ट्राजेक्टरी और लक्ष्यभेदी कारस्तानी हजारों मील दूर अमेरिकी मिलिट्री बेस से संचालित हो रही थी। अमेरिका खासतौर से पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अल-कायदा और तालिबानी आतंकवादियों को खोजने और उन्हें समाप्त करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।

खास बात ये है कि बैतुल्ला महसूद पर हमले के आदेश अमेरिका के राज्य नेवादा में मौजूद मिलिट्री स्टेशन से दिए गए थे। हमले में इस्तेमाल ड्रोन जहाज बेशक अफगानिस्तान में मौजूद अमेरिकी फौज के अड्डे से उड़े थे, लेकिन उन्हें नेवादा स्थित मिलिट्री की क्रीच फैसिलिटी से उपग्रह के जरिए संचालित किया जा रहा था। आज अमेरिका के अतिरिक्त कुछ ड्रोन विमान इंग्लैंड के फौजी जखीरे में भी हैं और गत वर्ष गाजा पर हमले के दौरान इजराइल ने भी पहली बार ड्रोन विमानों का इस्तेमाल किया था।

क्या है खासियत
दुश्मन पर हमले के लिए ड्रोन में घातक मिसाइल लगे होते हैं, यह विमान बिना पायलट के चलता है और अपने दुश्मन को खोज कर तुरंत ही उसका सफाया कर देता है। लेजर गाइडेड बम और एयर टू ग्राउंट मिसाइल से लैस यह यूएवी ड्रोन अमेरिकन आर्मी का प्रमुख हथियार है। एक बार में लगातार 24 घंटे तक 26,000 फीट की ऊंचाई तक आकाश में रहने वाला ये रोबोफाइटर अमेरिकन आर्मी का मुख्य हथियार है। यह यूएवी प्रशिक्षित पायलटों द्वारा ऑपरेट किए जाते हैं। इन्हें ऑपरेट करने वाला शख्स टारगेट से 7,500 मील दूर इन्हें ऑपरेट करता है। यूएवी (अनमैंड एरियल वेहिकल) डिजाइन, आकार, संरचना और गुण में अलग-अलग होते हैं। यूएवी की दो वैरायटी होती हैं, पहले, जिनका नियंत्रण रिमोट लोकेशन से होता है और दूसरे, प्री-प्रोगामिंग वाले यूएवी।

क्षमताएं
प्रीडेटर और रीपर ड्रोन जनरल एटॉमिक्स द्वारा बनाए जाते हैं। इनकी अपनी अलग वी-आकार की पूंछ होती है और 20 मीटर की विंगस्पैन होती है। ये आकाश में तीस घंटे से अधिक रह सकते हैं। इन विमानों को लोकल एयरफील्ड से लांच किया जाता है, लेकिन नियंत्रण सेटेलाइट द्वारा अमेरिका के क्रूबेस द्वारा होता है। एमक्यू9 की अधिकतम स्पीड 300 मील प्रति घंटा है और उसकी अधिकतम ऊंचाई 45,000 फीट होती है। इसकी लंबाई 36 फीट तक होती है और इसके विंगस्पैन 66 फीट होती है। इसमें लगे कैमरे, इंफ्रारेंड सेंसर, राडार वीडियो और स्टिल इमेज लेते हैं। कुछ क्षेत्र जिनका इस्तेमाल मुख्यत: सव्रेलंस के लिए किया जता है। कंट्रोलर वीडियो लक्ष्य को चुनने के लिए ड्रोन की वीडियो इमेज का इस्तेमाल करते हैं। 

यूएवी छह श्रेणियों में

1. लक्ष्य का भेदिया : पृथ्वी या हवा में मौजूद हथियारों को दुश्मन के विमान या मिसाइल तक पहुंचने का लक्ष्य स्पष्ट करता है।
2. प्राथमिक परीक्षण : यह युद्ध के मैदान के बारे में समुचित पड़ताल कर जानकारी देता है।
3. लड़ाकू : ज्यादा जोखिम वाले मिशन में ये प्रभावी है।
4. लॉजिस्टक : यूएवी को विशेषकर कार्गो और लॉजिस्टिक ऑपरेशन के लिए डिजाइन किया गया है।
5. सिविल और कॉमर्शियल यूएवी : सिविल और कॉमर्शियल अनुप्रयोगों के लिए प्रभावी है।
6. रिसर्च एंड डेवलपमेंट : जरूरत पड़ने पर ज्यादा विकसित यूएवी टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट किया जाता है।

रेंज/ऊंचाई के आधार पर भी इसे तीन श्रेणियों में बांटा जाता है

ल्ल हैंडहेल्ड,  2,000 फीट ऊंचाई, रेंज दो किमी. तक
ल्ल नाटो टाइप, 10,000 फीट ऊंचाई, रेंज 50 किमी. तक
ल्ल मेल, 30,000 फीट और अनिश्चित रेंज

यूएवी के मुख्य काम
रिमोट सेंसिंग : यूएवी के रिमोट सेंसिंग फंक्शन में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम सेंसर, बायोलॉजिकल और केमिकल सेंसर, इंफ्रारेड और रेडार होते हैं। बायोलॉजिकल सेंसर हवा में मौजूद कण और माइक्रोऑर्गेनिज्म की पहचान करने में सक्षम होते हैं। केमिकल सेंसर लेजर स्पैक्ट्रोस्कोपी द्वारा हवा में मौजूद एलीमेंट की सांद्रता के बारे में पता करते हैं।

वैज्ञानिक शोधकार्यो में : वैज्ञानिक शोधकार्यो में भी यूएवी एयरक्राफ्ट प्रभावी होता है, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां पायलट को भेजने में जोखिम होता है।

हमलों के दौरान :  एमक्यू-1 प्रीडेटर का इस्तेमाल युद्धक हमलों के दौरान भी किया जाता है। अफगानिस्तान पर हमले के लिए इसका पहली बार इस्तेमाल 2001 में पाकिस्तान और उजबेकिस्तान के बेस से किया था।

तलाश के दौरान : यूएवी का प्रयोग किसी आपदा के दौरान लोगों को तलाशने के काम में भी किया जाता है। इसका पहली बार प्रदर्शन 2001 में ल्यूसिना और टेक्सान में आए चक्रवात के दौरान किया गया था। प्रीडेटर एसएसआर की मदद से बादल, वर्षा और धूम्र की तस्वीरें लेने में भी किया जाता है।

ट्रांसपोर्ट :  यूएवी सामान को भी ले जाने में सक्षम होता है।

डिजाइन : अमेरिका और इजराइल इस तकनीक के पुरोधा के तौर पर जाने जाते है। 2006 में इस बाजार में अमेरिकी हिस्सा 60 प्रतिशत था। नॉर्थरूप ग्रूमेन और जनरल एटॉमिक्स इस इंडस्ट्री के बड़े निर्माता हैं। यूएवी में सेंसर फ्यूजन होता है जो विभिन्न सेंसरों की जानकारी एकत्र करता है।

अमेरिकी फौज और गुप्तचर संस्था सीआईए ड्रोन विमानों को उनकी दूर तक की मारक क्षमता के कारण बहुत उपयोगी मान रही हैं, लेकिन इसके आलोचकों का कहना है कि इसके हमले में बेगुनाह नागरिक भी बेवजह निशाना बन जाते हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल अभी तक विवादों के घेरे में है।

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