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‘राजनीतिक समीकरणों से तय न हो अर्थव्यवस्था’

ेंद्र में नई सरकार गठित होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। नई सरकार के सत्ता में आने से पहले ही घरेलू उद्योग जगत ने नई सरकार के समक्ष अपना एजेंडा रखने की कवायद शुरू कर दी है। प्राथमिकता एजेंडा पेश करने से पहले उद्योग जगत ने आगामी कुछ दिनों में गठित होने जा रही सरकार को आगाह किया है कि वह अर्थव्यवस्था की वास्तविक हकीकत से आंख चुराने के बजाय अपनी ठोस और प्रभावी नीतियों के जरिए उसका सामना कर, अन्यथा देश में नये रोगार के सृजन, गरीबी स्तर में कमी और सामाजिक ढांचे के निर्माण संबंधी लक्ष्य सिर्फ हवाई किले साबित होकर रह जाएंगे। इसके लिए जरूरी है कि सरकार को राजनीतिक समीकरणों के आधार पर घरलू अर्थव्यवस्था को संचालित न कर। उद्योग चैंबर फिक्की के मुताबिक नई सरकार के समक्ष सर्वाधिक महत्वपूर्ण चुनौती अर्थव्यवस्था को ऊंची विकास दर के स्तर पर पहुंचाना है। इसी से रोगार का सृजन और गरीबी के स्तर में कमी का मामला जुड़ा हुआ है। मोटे तौर परीसदी की विकास दर 0 लाख से एक करोड़ सालाना नई नौकरियों का सृजन संभव होता है जबकि बेरोगारी मिटाने के लिए हमें सालाना 1.20 करोड़ नई नौकरियों का इंतजाम करने की जरूरत है।

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