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संपत्ति घोषणा पर मानेंगे संसद की बातः बालाकृष्णन

संपत्ति घोषणा पर मानेंगे संसद की बातः बालाकृष्णन

प्रधान न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने रविवार को कहा कि न्यायपालिका न्यायाधीशों की संपत्ति घोषित किए जाने के खिलाफ नहीं है और अगर संसद में इस संबंध में कोई कानून पारित होता है तो न्यायपालिका उसका पालन करने को तैयार है।

मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का सम्मेलन यहां समाप्त हो जाने के बाद बालाकृष्णन ने संवाददाताओं से कहा कि संसद को कोई कानून बनाने दीजिए, हम उसका पालन करेंगे। बालाकृष्णन न्यायाधीश संपत्ति विधेयक के एक उपबंध के विरोध के बारे में पूछे जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। उस उपबंध में न्यायाधीशों की घोषणा को सार्वजनिक नहीं किए जाने का प्रावधान है।

विधेयक के उपबंध छह के अनुसार न्यायाधीशों द्वारा उचित प्राधिकार के सामने की गई घोषणाओं को सार्वजनिक नहींकिया जाएगा। विपक्ष के विरोध के कारण सरकार संसद में वह विधेयक नहीं पेश कर सकी थी।

सम्मेलन के एजेंडा के बारे में प्रधान न्यायाधीश बालाकृष्णन ने इस बात से इंकार किया कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर विचार-विमर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह एजेंडा से बाहर नहीं था और उच्च न्यायालयों में सतर्कता विभाग अधीनस्थ न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मुद्दे को देख रहा है। उन्होंने कहा कि एजेंडा में भ्रष्टाचार शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था।

बालाकृष्णन लेकिन उच्चतम न्यापालिका साहित उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मुद्दे को टाल गए और कहा कि सम्मेलन निजी शिकायतों पर विचार विमर्श के लिए मंच नहीं था। मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर रघुपति मुद्दे पर बालाकृष्णन ने कहा कि वह अपने के बयान पर कायम हैं। मैं अपने बयान पर कायम हूं कि किसी मंत्री ने न्यायाधीश से टेलीफोन पर संपर्क नहीं किया था।

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