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वनडाउन की असफलता से बनी द्रविड़ की राह

वनडाउन की असफलता से बनी द्रविड़ की राह

राहुल द्रविड़ की दो साल बाद वनडे टीम में वापसी का मुख्य कारण इस दौरान भारतीय मध्यक्रम विशेषकर तीसरे नंबर पर उतरने वाले बल्लेबाज की लगातार असफलता रही जो कि श्रीमान भरोसेमंद का बल्लेबाजी क्रम में पसंदीदा स्थान है।

अक्तूबर 2007 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम वनडे खेलने वाले द्रविड़ को चयनकर्ताओं ने रविवार को श्रीलंका में होने वाली त्रिकोणीय सीरीज और दक्षिण अफ्रीका में होने वाली चैंपियन्स ट्राफी के लिए वनडे टीम में चुना। द्रविड़ को अपनी वनडे योजना से बाहर करने के बाद चयनकर्ता तीसरे नंबर के लिए कोई अदद बल्लेबाज नहीं ढूंढ पाए थे और बल्लेबाजी क्रम का सबसे महत्वपूर्ण स्थान वनडाउन टीम की कमजोर कड़ी बन गया था।

द्रविड़ ने अब तक हालांकि जो 333 वनडे मैच खेले हैं उनमें से उन्होंने 102 मैच में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 39.49 की औसत से 3735 रन बनाए। द्रविड़ ने अपने 12 शतक में से सात शतक वनडाउन बल्लेबाज के रूप में बनाए। इसके अलावा उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरकर 25 अर्धशतक भी ठोके।

द्रविड़ को वनडे टीम से बाहर करने के बाद भारत ने 47 मैच में आठ बल्लेबाजों को तीसरे नंबर पर आजमाया है। इनमें गौतम गंभीर भी शामिल है जो चोटिल वीरेंद्र सहवाग की अनुपस्थिति में सचिन तेंदुलकर के साथ पारी का आगाज करेंगे।

गंभीर ने द्रविड़ की गैर-मौजूदगी में सर्वाधिक 16 पारियों में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की जिसमें उन्होंने 44.35 की औसत से 621 रन बनाए जिसमें श्रीलंका के खिलाफ ब्रिस्बेन में नाबाद 102 रन और आस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में 113 रन की पारी भी शामिल है। इन दोनों पारियों के अलावा वह वनडाउन बल्लेबाज के रूप में केवल दो बार ही 50 रन की संख्या पार कर पाए। गंभीर ने नंबर तीन पर जो पिछली सात पारियां खेली उनमें वह 140 रन ही बना पाए।

सुरेश रैना को भी नंबर तीन बल्लेबाज के रूप में तैयार करने की कोशिश की गई लेकिन उत्तर प्रदेश का यह बल्लेबाज भी इस भूमिका से कभी न्याय नहीं कर पाया। द्रविड़ के बाहर होने के बाद तीसरे नंबर पर 12 पारियों में 23.58 की औसत से 283 रन ही बना पाए। रोहित शर्मा भी छह पारियों में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे जिसमें उन्होंने 14.50 की औसत से 87 रन बनाए।

युवराज सिंह को भी पिछले दो साल में पांच पारियों में इस नंबर पर भेजा गया लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ ढाका में 55 रन बनाने के अलावा बाकी चार पारियों में 35 रन ही बना पाए। विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक तो द्रविड़ के बाहर होने के तुरंत बाद इस भूमिका में आजमाए गए लेकिन पहले मैच में ही शून्य पर लुढ़कने के बाद टीम प्रबंधन ने उन पर आगे फिर दांव नहीं खेला।

धोनी ने इस बीच इरफान पठान को भी दो मैच में पिंच हिटर के तौर पर नंबर तीन पर भेजा लेकिन वह 18 और 14 रन बनाकर टीम को संकट में डाल गए। ऐसे में धोनी तीन मैचों में खुद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे और इन तीनों मैच में भारतीय कप्तान ने अच्छी पारियां खेली।

इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने इसी साल के शुरू में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ 94 रन बनाए और फिर जब वह न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर में तीसरे नंबर पर उतरे तो उनके नाम पर नाबाद 84 रन की पारी दर्ज थी। वह वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे मैच में भी वनडाउन पर उतरे जिसमें उन्होंने नाबाद 46 रन बनाए।

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