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आय गरीबी मापने का सही आधार नहीं: सेन

आय गरीबी मापने का सही आधार नहीं: सेन

प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता आमर्त्य सेन का मानना है कि गरीबी के निर्धारण के लिए आय का आधार सही पैमाना नहीं है।

अर्थशास्त्री, दार्शनिक और गणितत्र सेन अपनी हालिया पुस्तक द आइडिया आफ जस्टिस में कहते हैं, कि गरीबी का आकलन करने के लिए आय धारणा इस बात की विश्वसनीय मापक नहीं है कि लोग आखिर कैसे जीते हैं। आय धारणा के तहत यह माना जाता है कि जिस व्यक्ति की सालाना आय निश्चित राशि से कम है, वह गरीब है।

इसके एवज में सेन गरीबी का आकलन करने के लिए व्यक्ति को अपने ढंग से जीवन संचालित करने की योग्यता याक्षमता को आधार मानते हैं।
 योग्यता आधार पर गरीबी आकलन के बारे में वह कहते हैं, परिवार के भीतर संपत्ति वितरण में अंतर के कारण आय के आधार पर हम जो गरीबी का निर्धारण करते हैं, वह उससे कहीं अधिक सान हो सकती है।

उदाहरण के लिए अगर परिवार की आय गैरआनुपातिक है और वह किसी एक व्यक्ति के हितों को पूरा करती है। ऐसीस्थिति में परिवार की कुल आय उपेक्षित सदस्यों की वास्तवित स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाएगी। सेन कहते हैं कि आय किसी व्यक्ति के जीवन के स्तर का संकेतक नहीं हो सकता है। व्यक्ति किस प्रकार का जीवनस्तर जीता है, वह भौतिक पर्यावरण में अंतर, सामाजिक पर्यावरण में विविधता आदि जैसी चीजों पर भी निर्भर करता है।

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