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हमारी जमीन का भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगा

नेपाल से रिश्ते सुधरने की एक बार फिर उम्मीद बंधी है। नेपाल की विदेशमंत्री सुजाता कोईराला इस हफ्ते जब भारत आईं तो काठमांडू और नई दिल्ली के बीच संवाद के तार एक बार फिर जुड़ गए। नेपाल की पिछली सरकार के दौरान रिश्तों में जो शक, शुबहे और खटास बनी थी, वह अभी भले ही पूरी तरह गई न हो लेकिन एक उम्मीद तो बंधी ही है। इसलिए भी कि विदेश मंत्री के इस दौरे के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री भी भारत आ रहे हैं। सुजाता कोईराला की इस यात्रा के दौरान उनसे रू-ब-रू हुए विशेष संवाददाता सुशील शर्मा-


प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व अन्य नेताओं के साथ बातचीत कैसी रही?
बातचीत काफी उत्साहजनक रही। प्रधानमंत्री सिंह से मुलाकात में मैंने नेपाल में शांति बहाली, निवेश, व्यापार, ढांचागत सुविधाओं के विकास में भारत से सहयोग की बात कही। उनका रवैया काफी सकारात्मक रहा। डॉ. सिंह चाहते हैं कि नेपाल में जल्दी से जल्दी शांति प्रक्रिया सिरे चढ़े और नया संविधान तैयार हो। भारतीय प्रधानमंत्री ने नेपाल की मौजूदा सरकार को सहयोग देने की बात कही है। उन्होंने हर तरह से हमारी मदद का भरोसा दिया है। गृहमंत्री पी. चिदंबरम से बातचीत में मैंने बताया कि नेपाल में बढ़ रहे अपराधों की रोकथाम के लिए हमारी पुलिस को प्रशिक्षण की जरूरत है। नेपाल और भारत की सीमाएं खुली हैं। सीमा के रास्ते अपराध की रोकथाम और नकली करेंसी के मुद्दे पर भी बात हुई।
सीमा प्रबंधन के लिए भारत किस तरह का सहयोग देने को राजी हुआ है?
नेपाल के तराई वाले इलाके में अपराध काफी बढ़े हैं। पुलिस के पास जरूरी हथियारों की कमी और पुलिस कुछ हद तक हतोत्साहित है।भारत ने भरोसा दिया है कि वह नेपाल के साथ मिल कर सीमा के प्रबंधन में सहयोग करेगा।
व्यापार संधि के नवीनीकरण की अवधि बढ़ाए जने पर क्या प्रतिक्रिया रही?
वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से इस बारे में सहमति हो गई है। पांच वर्ष के बजाय अब सात वर्षो बाद व्यापार संधि के नवीनीकरण का फैसला किया गया है।
भारत प्रत्यर्पण संधि करना चाहता है। क्या नेपाल इसके लिए तैयार है?
यह मुद्दा उठा जरूर, लेकिन नेपाल की मौजूदा सरकार एक अंतरिम सरकार है। कोई भी संधि या समझोता नेपाल के राजनीतिक दलों कीआम राय से ही हो सकता है। लेकिन मैं आपको यह भरोसा जरूर देती हूं कि नेपाल की जमीन का भारत या चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।
भारत में आम धारणा बन रही है कि नेपाल का झुकाव अब चीन की ओर हो रहा है।
भारत और चीन नेपाल के दो बड़े पड़ोसी देश हैं। दोनों ही बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। इन दोनों देशों की तरक्की का लाभ नेपाल को भी मिलता है। हम दोनों देशों के साथ मधुर संबंध बनाए रखना चाहते हैं। भारत के साथ हमारे प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध भी हैं।नेपाल में स्थिरता और शांति बहाली के लिए भारत का सहयोग काफी जरूरी है। नेपाल पंचशील के सिद्धांत में विश्वास करता है।
क्या भारतीय नेतृत्व ने नेपाल में विशेष आर्थिक क्षेत्र के विकास की आपकी बात मान ली?
जी, हां, भारत का रवैया काफी सहयोग पूर्ण है। वीरगंज के अलावा हम चाहते हैं कि भारत विराट नगर, सुनसारी, नेपालगंज आदि में भी विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास में सहयोग दे। प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल की 18 अगस्त से भारत यात्रा के दौरान इस पर और बातचीत होगी। 
1950 की शांति संधि को रद्द करने या बदलने पर भी कोई बात हुई?
नहीं, हमारी बातचीत में यह मुद्दा नहीं उठा।
नेपाल में शांति बहाली और नया संविधान बनाने की प्रक्रिया कैसी चल रही है?
जनता ने हमारी अंतरिम सरकार को यही दो काम करने को कहा है। यही हमारे लिए जनादेश है। हम भरपूर कोशिश कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि माओवादी भी इसमें सहयोग करेंगे। कभी इस मामले में प्रगति होती है, कभी हम अटक जाते हैं। अब मेरे पिता और पूर्वप्रधानमंत्री गिरिज प्रसाद कोईराला ने एक उच्च स्तरीय राजनीतिक समिति बना रहे हैं। वही इसके संयोजक होंगे। माओवादी नेता प्रचंड ने भी इस पर सहमति जताई है। इससे सकारात्मक माहौल बनने की उम्मीद है।
क्या आपने भारत से इनसास राइफलों जैसे छोटे हथियारों की मांग की है?
भारत हमेशा ही नेपाल को इस मामले में सहयोग देता रहा है। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने नेपाली सेना को प्रशिक्षण देने का भरोसा दिया है। साथ ही सेना के लिए कपड़ा और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने पर बातचीत हुई है।

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