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राहत चलाने में पीछे नहीं हटेगी सरकार: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार व देश के अन्य हिस्से सूखे की संकट से गुजर रहे हैं। खेती के समय ही बारिश नहीं हुई। धान की रोपनी काफी कम हुई है। अभी बिहार के 38 में से 26 जिले सूखाग्रस्त घोषित किये गये हैं। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो अन्य जिलों को भी सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ेगा। यह सूबे के लिये संकट की घड़ी है। मुख्यमंत्री शनिवार को राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 62वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडोत्तोलन के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इसके पहले मुख्यमंत्री ने सेना, अर्धसैनिक बल के साथ ही पुलिस बलों की विभिन्न टुकड़ियों की सलामी ली।

उन्होंने कहा कि किसी को भूखा नहीं रहने दिया जायेगा। सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। सूखा संकट से उबरने के लिए बिहार सरकार ने केन्द्र सरकार के सामने 23 हजार करोड़ रुपये की मांग रख दी है। विशेष पैकेज का प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया गया है। इसमें सूखाग्रस्त इलाकों में तीन माह तक राहत वितरण किया जायेगा। जरुरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जायेगा। 

उन्होंने कहा कि राज्य के 26 जिलों में 1.26 करोड़ परिवार सूखे की चपेट में हैं। फिलहाल 90 दिनों के लिए अनाज मांगा गया है। अगर मौसम की बेरूखी बरकरार रही तो और कई बार अनाज बांटना पड़ेगा। हमने आपदा राहत कोष (सीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक कोष (एनसीसीएफ) के प्रावधानों के तहत राहत पैकेज की मांग की है। इसके अलावा नरेगा के तहत एक सौ दिन काम देने की सीमा समाप्त करने की भी मांग की गयी है। चुनौतियों को अवसर के रूप में बदलना होगा।

इसके लिए सब को मिलकर काम करना पड़ेगा। 2007 और 2008 में जितनी सहायता केंद्र से बिहार को मिलनी चाहिए थी उतनी नहीं मिली। वर्तमान स्थिति से निपटने के लिए राज्य व जिला स्तर पर सर्वदलीय बैठक की गयी है। माह में दो प्रभारी मंत्री सभी दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। पंचायत स्तर पर राहत कार्य चलाया जायेगा। बारिश नहीं होने से पेयजल का भी संकट होने लगा है। जरुरत पड़ी तो गांवों में टैंकर के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा। किसानों को चार पटवन के लिए डीजल पर अनुदान दिया जा रहा है। बीज पर भी 50 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है।

सूखे की असर रब्बी के फसलों पर भी पड़ेगा। बिहार के बच्चों को दूसरे राज्यों में जलील किया जाता है। एक के प्रत्येक नागरीक के लिए पूरा देश खुला है। जहां चाहें वहां जा सकते हैं। सरकार कृषि के विकास पर ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कृषि रोड मैप के अनुसार किसानों पर सही मूल्य दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि हर भारतीय के व्यंजन में एक बिहार उत्पाद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाज के महादलितों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए महादलित विकास मिशन का गठन किया गया है।

महादलितों को रहने के लिए घर, बिजली, पानी व शौचालय आदि का प्रबंध किया जायेगा। महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण महिलाओं के ममता कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। ममता कार्यक्रम के तहत रविदास परिवार के महिलाओं को जोड़ा जायेगा। उन्हें प्रशिक्षण देने के बाद किट्स उपलब्ध कराये जायेंगे। विकलांग बच्चों को भी पेंशन मिलेगा। इसमें उम्र सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है।

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