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कॉमेडी से भरपूर है लाइफ पार्टनर

कॉमेडी से भरपूर है लाइफ पार्टनर

कहानी : जीत ओबेरॉय (गोविंदा), करन मल्होत्र (फरदीन खान) और भावेश पटेल
(तुषार कपूर) तीनों अच्छे दोस्त हैं और केप टाउन में रहते हैं। करन को जुगरान (अनुपम खेर) की सिरचढ़ी बेटी संजना जुगरान (जेनेलिया डिसूजा) से प्यार हो जाता है। उधर, करन और संजना के प्यार को परवान चढ़ते देख भावेश से रहा नहीं जाता और एक दिन वह अपने बाबूजी (दर्शन जरीवाला) से कह देता है कि वह अब बच्च नहीं रहा। भावेश करन, जीत और संजना को बताता है कि उसे शादी के लिए लड़की देखने गुजरात जाना है। जीत तो उनके साथ नहीं जाता, लेकिन संजना और करन उसके साथ चले जाते हैं। वहां भावेश की  जडेजा (विक्रम गोखले) की बेटी प्राची देसाई (प्राची जडेजा) से शादी हो जाती है। करन और संजना भी इनके साथ शादी कर लेते हैं, लेकिन शादी के तीन महीने बाद ही ये दोनों जोड़े कोर्ट में तलाक की अपील करते हैं, जिसमें उनकी मदद करता है जीत।

निर्देशन :  पिछले साल ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’ से निर्देशक रूमी जाफरी ने काफी निराश किया था, लेकिन इस बार उनकी यह फिल्म एक सरप्राइज पैकेज की तरह है। हालांकि फिल्म को ज्यादा हाइप नहीं मिली है, लेकिन कलाकारों से उन्होंने जमकर काम लिया है। रूमी इंटरवल से पहले हंसी-ठहाकों के बीच दर्शकों को बांधने में कामयाब रहे। इंटरवल के बाद कुछ उन्होंने गंभीर लम्हों को हल्के-फुल्के अंदाज में पूरा किया, जिससे फिल्म की लय बनी रही।   क्लाइमैक्स को उन्होंने सस्ते में निपटा दिया।  

अभिनय : ‘पार्टनर’ के दो साल बाद गोविंदा अपने फॉर्म में दिखे। वह पहले से ज्यादा स्मार्ट, फ्रेश और स्टाइल के लिहाज से काफी अपडेट लगे हैं। उनकी कॉमेडी में एक बार फिर वैरायटी नजर आती है। जेनेलिया ने सीन स्टीलर का काम किया है। फरदीन का खीजना दर्शकों को हंसाता है। तुषार कपूर ने सादगी में भी कॉमेडी परोसी है। ‘रॉकऑन’ के बाद प्राची देसाई ने दिखा दिया कि उनके अभिनय में काफी गुंजाइश है। सख्त पिता के रोल में दर्शन जरीवाला भी काफी जमे हैं। अनुपम खेर फस्र्ट रेट रहे और जगदीप ने छोटे से रोल में अपने अनुभव का अहसास कराया।     

गीत-संगीत : ‘कू के कोयलिया’ गीत फिल्म की जान है। प्रीतम का लगातार पॉपुलर होता संगीत फिल्म को लिफ्ट कराता है। ‘पुर्जा पुर्जा’ के बीट्स अच्छे हैं, जिस पर गोविंदा का डांस देखने लायक है।
क्या है खास : केप टाउन के लोकेशंस, कॉमेडी  पंच, ‘कू के कोयलिया’ गीत और सहज ट्रीटमेंट आदि।
क्या है बकवास : जीत का अचानक शादी का फैसला और सस्ते में निपटा क्लाइमैक्स।
पंचलाइन : इस फिल्म की ज्यादा हाइप नहीं है, फिर भी रुटीन स्टोरी को कॉमेडी की चाशनी में अच्छे से परोसा गया है।       

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