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...और लालकिले के चारो तरफ था सिर्फ जन-गण-मन

...और लालकिले के चारो तरफ था सिर्फ जन-गण-मन

मंदिर-मस्जिद और सड़कें-गलियां हर तरफ अगर कुछ था तो वह था जन-गण-मन का उत्साह। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले का माहौल कुछ ऐसा था मानों वहां मौजूद हर शख्स खुद को आजादी के हसीन पलों को महसूस करने को बेताब हो।

राजधानी के हर गली मुहल्ले, सड़क चौराहे पर रात भर मुस्तैद जवानों की आखों में भी नींद नहीं दिख रही थी। उनके चेहरे पर थी एक चिंता कि बिना किसी विघ्न-बाधा के आजादी का उत्सव पूरा हो जाए।

कुछ जवानों से बात करने पर उन्होंने बताया कि वह रात में 11 बजे से ही ड्यूटी पर तैनात हैं। लेकिन उन्हें इस लंबी ड्यूटी से थोड़ा भी शिकवा नहीं था, सबके मन में एक ही दुआ थी कि स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम सकुशल निपट जाए।

लालकिले और उसके आसपास का माहौल पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जमीन से लेकर हवा तक प्रशासन ने कोई कोताही नहीं बरती थी। हवा में गश्त लगाते हेलिकॉप्टरों से हवा में भी किलेबंदी की गई थी, तो वहीं जमीन पर जवानों की चौकस निगाहें हर खतरे को परास्त करने को तैयार खड़ी थी।

हालांकि कुछ लोगों को यह सुरक्षा रास नहीं आई। लालकिले के अंदर जाने का असफल प्रयास करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि यह कैसी आजादी कि लोगों को लालकिले पर भाषण सुनने की मनाही है। उन्होंने खींझते हुए कहा कि अगर सरकार को इतना ही डर है तो स्वतंत्रता दिवस मनाने की जरूरत क्या है।

आज के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का अगर सबसे लुभावना कोई क्षण दिखा, तो वह था गुब्बारों के माध्यम से तिरंगे को आसमान में फहराने का। लालकिले पर उपस्थित हर नजर हवा में तैरते गुब्बारों की ओर टकटकी लगाए देख रही थीं।

लालकिले के आसपास के मंदिरों और सड़कों पर भी आज तिरंगा लहराता हुआ दिखा। वहीं आसमान में उड़ती पतंगे आजादी के इस खास दिन को दुनिया को दिखाने को बेताब नजर आ रही थीं। इस अवसर पर मीडियाकर्मियों के अंदर एक खास तरह की व्याकुलता थी। टीआरपी का चक्कर और कुछ न छूटने का दबाव कहीं न कहीं मीडियाकर्मियों को उतावला बना रहा था। हर मीडियाकर्मी सब कुछ अपने कैमरे में कैद करने और अपनी डायरी पर उतार लेने को बेताब था।

स्वतंत्रता दिवस के इस कार्यक्रम का एक अविस्मरणीय क्षण प्रधानमंत्री को 21 तोपों की सलामी देने का था। जैसे ही पहले तोप का गोला दागा गया, तो पहले गोले की आवाज के साथ पूरा आसमान कबूतरों और चिड़ियों के कवरल से गूंज उठा। इन सबके बीच हजारों की संख्या में रंग बिरंगे कपड़े पहने बच्चों की चहलकदमी भी इस पूरे आयोजन को कुछ खास बना रही थी।

कार्यक्रम की समाप्ति के बाद लालकिले पर मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर एक निश्चिंतता और सुकून का भाव था और छुट्टी का रोमांच था सो अलग, क्योंकि अब आज पूरे दिन और कल रविवार के दिन छुट्टी मनाने का उन्हें भरपूर मौका जो मिल रहा है।

 

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