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सूखे-फ्लू-मंदी का करेंगे सामना: पीएम

सूखे-फ्लू-मंदी का करेंगे सामना: पीएम

सूखे,स्वाइन फ्लू और वैश्विक मंदी के घुमड़ते बादलों के बीच प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि डर और घबराहट की वजह से हमारे रोजमर्रा के काम रूक जाएं।

उन्होंने यकीन जताया कि हम इन परिस्थितियों का सामना बखूबी कर पाएंगे।  इस अवसर पर उन्होंने दूसरी हरित क्रान्ति लाने की अपील के साथ देश को नया नारा दिया ‘पानी बचाओ’।

बलिदान, विकास और शांति के प्रतीक तिरंगे राष्ट्रध्वज को देश के 63वें स्वतंत्रता दिवस पर फहराने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने जहां एक ओर सामाजिक समरसता के साथ प्रगति का ताना बाना बुना वहीं व्यापारियों और उद्योगपतियों से दो टूक कहा कि इस कठिन दौर से निपटने के लिए हमारे साथ मिलकर काम करें और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभायें।

वहीं ऐसा नहीं करने वालों का क्या होगा इसका उल्लेख भी उन्होंने किया,  मैं सभी राज्य सरकारों से अपील करूंगा कि वे आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करें।

रिमझिम फुहारों के बीच प्रधानमंत्री के राष्ट्र को संबोधन के दौरान वहां संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी, कई केन्द्रीय मंत्री, भारत के प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और प्रधानमंत्री की पत्नी गुरशरण कौर के अलावा अनेक देशों के राजदूत उपस्थित थे। 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण से पहले वहां पंहुचने पर प्रधानमंत्री ने सलामी गारद का निरीक्षण किया। इससे पहले उन्होंनें राजघाट और अन्य नेताओं के समाधि स्थल पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्र को प्रगति के शिखर पर पहुंचाने का शब्दचित्र बनाते प्रधानमंत्री ने जहां भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नक्सलवाद, सांप्रदायिक हिंसा से निपटने का मंतव्य और मार्ग स्पष्ट किया, वहीं झुग्गी-झोपड़ी और कन्या भ्रूण हत्या से मुक्त भारत बनाने का संकल्प भी किया।

प्रधानमंत्री ने विधायिका में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिलाने का वादा तो दोहराया ही, उसके साथ ही ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में आधी आबादी को आधा यानी 50 प्रतिशत आरक्षण देने का नया वादा भी किया।

करीब पौन घंटे के संबोधन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सरोकारों की एक-एक कर सुध ली। उन्होंने सूखे के संदर्भ में साफ किया कि इस साल मानसून में कुछ कमी हुई है। इसका कुछ विपरीत प्रभाव तो हमारी फसलों पर पड़ेगा पर मुझे यकीन है कि हम इस परिस्थिति का सामना बखूबी कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि सूखे का मुकाबला करने के लिए हम अपने किसान भाईयों को हर प्रकार की मदद देंगे। मानसून में कमी को देखते हुए हमने किसानों द्वारा बैंकों से लिये गये कर्ज की अदायगी की तारीख को मुल्तवी कर दिया है। इसके अलावा कम मियाद वाले फसल ऋण पर ब्याज की अदायगी के लिए हम किसानों को अतिरिक्त सहायता दे रहे हैं।

देश के लिए एक और हरित क्रांति की जरूरत बताते समय प्रधानमंत्री ने इस दिशा में भरपूर कोशिश करने का वायदा किया और कृषि वृद्धि दर को अगले पांच साल में चार फीसदी करने का लक्ष्य तय किया। इसके लिए उन्होंने कृषि में आधुनिकीकरण और जमीन और जल के कुशल संयोजन की आवश्यकता बतायी।


सूखे के कारण चिंतित देशवासियों को सिंह ने आश्वस्त किया कि हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार हैं। अनाजों, दालों और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। हम चाहते हैं कि देश का कोई भी नागरिक कभी भूखा न सोये। हमारा वादा है कि हम एक खाद्य सुरक्षा कानून बनाएंगे, जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले हर परिवार को हर महीने एक निश्चित मात्रा में रियायती दरों पर अनाज दिया जाएगा। कुपोषण की समस्या का अंत करना भी हमारा राष्ट्रीय संकल्प है ।

स्वाइन फ्लू से परेशान देशवासियों को उन्होंने आश्वस्त किया कि केन्द्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस बीमारी पर काबू पाने की हर जरूरी कोशिश करती रहेगी।  मैं आपको यह भरोसा भी दिलाना चाहता हूं कि हालात ऐसे नहीं हैं कि डर और घबराहट की वजह से हमारे रोजमर्रा के काम रूक जाएं।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के जरिए ग्रामीण स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले हर परिवार के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के विस्तार का इरादा भी साफ किया। उन्होंने देश को जल्द से जल्द झुग्गी-झोपड़ी रहित बनाने के लिए अगले पांच साल में बेहतर आवास सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राजीव आवास योजना शुरू करने का संकल्प दोहराया।


वैश्विक मंदी के कारण 6.7 प्रतिशत पर लुढ़की विकास दर को फिर से नौ प्रतिशत पर लाने को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जो भी कदम जरूरी है, हम उठाएंगे। चाहे वे देश में ज्यादा पूंजी लाने के लिए हों, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हों या सरकारी निवेश बढ़ाने के लिए। हमें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हालात में सुधार होगा, परंतु उस समय तक हम सभी को वैश्विक आर्थिक मंदी के बोझ को सहन करना होगा।

इन मुश्किल हालात का जिक्र करते हुए सिंह ने साफ किया कि नागरिकों को अपनी नाखुशी और गुस्से का इजहार करने का पूरा हक है। उनके प्रति सरकार को संवेदनशील होना चाहिए। वहीं उन्होंने ऐसा करने वालों को खबरदार किया,  सरकारी संपत्ति की तोड़-फोड़ और खून खराबे से कुछ हासिल नहीं होता। असहमति जताने के लिए हिंसा का सहारा लेने वालों के लिए हमारे लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है और सरकार ऐसे लोगों से सख्ती से निपटेगी।

देश के कुछ हिस्सों में फैली नक्सलवादी समस्या के संदर्भ में उन्होंने कहा कि नागरिकों की जान और उनकी आजादी की हिफाजत सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। जो लोग सोचते हैं कि बंदूक के बल पर राज किया जा सकता है, वे लोकतंत्र की मजबूती नहीं समझते। उन्होंने कहा कि नक्सली गतिविधियों से निपटने के लिए केन्द्र सरकार अपनी कोशिशों में तेजी लाएगी।

राज्य पुलिस बलों को आधुनिक और प्रभावी बनाने में हम राज्य सरकारों की पूरी मदद करेंगे। जहां जरूरत होगी, वहां केन्द्रीय सुरक्षा बल भी उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्यों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए भी केन्द्र सरकार और अधिक प्रयास करेगी। हम सामाजिक और आर्थिक असंतोष के उन कारणों को भी दूर करने का प्रयास करेंगे, जिनसे नक्सलवाद जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहीं पाकिस्तान का किसी भी रूप में नाम नहीं लिया। सिर्फ इतना कहा कि हम अपने पड़ोसियों के साथ अमन और शांति से रहना चाहते हैं। अलबत्ता आतंकवाद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मुंबई में पिछले साल नवंबर में हुए भयानक आतंकी हमले के बाद हमारी सरकार ने इसके खिलाफ कई कदम उठाये हैं। आतंकी गतिविधियों को खत्म करने के लिए हमारी खुफिया एजेंसियों और सुरक्षाबलों को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। मुझे यकीन है कि समाज के सभी तबकों के भरपूर सहयोग से हम अपने देश से आतंकवाद को खत्म करने में कामयाब होंगे।

हाल में विपक्षी दलों की ओर से देश की सर्वमान्य विदेश नीति में मनमाने बदलाव के आरोपों को खारिज करते हुए सिंह ने कहा,  हमारी विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए कि जो इन लगातार बदलते हुए हालात में भारत के हितों के लिए काम कर सके । मुझे खुशी है कि हम ऐसा करने में काफी हद तक कामयाब हुए हैं।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं का बिना नाम लिये कहा कि इन बहुपक्षीय संस्थाओं की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता पर सवाल उठाये जा रहे हैं। ध्यान रहे कि भारत इन संस्थाओं के ढांचे में बदलाव की मांग वैश्विक मंचों से करता रहा है।

जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चिंता से स्वयं को संबद्ध करते हुए उन्होंने कहा कि हमने आठ राष्ट्रीय मिशन बनाने का फैसला किया है और इन आठ मिशनों के जरिए हम जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सौर उर्जा का प्रयोग बढ़ाने के लिए और उसे सस्ता करने के लिए इस साल 14 नवंबर को हम जवाहरलाल नेहरू सोलर मिशन की शुरुआत करेंगे।


प्रधानमंत्री ने इस राष्ट्रीय दिवस पर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर अपनी चिंताओं को राष्ट्र के समक्ष रखा। हम कितने ही अच्छे कार्यक्रम और योजनाएं क्यों न शुरू कर दें। जब तक हमारा सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हो जाता, इन ययोजनाओं का फायदा जनता तक नहीं पंहुचेगा। डिलीवरी सिस्टम में हमें सुधार लाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों का तेजी से अमल, पंचायतीराज संस्थानों के माध्यम से प्रशासन के विकेन्द्रीकरण और सरकार तथा जनता के बीच नई भागीदारी के लिए पहल करने का मंतव्य साफ किया ।

भारतीय जनजीवन में गंगा के विशिष्ट स्थान को देखते हुए प्रधानमंत्री ने इसे साफ करने में आम आदमी के सहयोग की अपेक्षा की और कहा कि पवित्र गंगा नदी भारत के करोड़ों लोगों के लिए जीवन स्रोत है। हमारा कर्तव्य है कि हम गंगा को साफ रखें। हमने राष्ट्रीय गंगा प्राधिकरण बनाया है। इसके तहत केन्द्र और राज्य सरकारें आपसी सहयोग से इस पवित्र नदी को साफ सुथरा रखने की कोशिश करेंगी।

इस राष्ट्रीय पर्व पर प्रधानमंत्री ने पिछले चुनाव के फलित से देश और लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाला बताया और विपक्ष पर परोक्ष रूप से चुटकी लेते हुए कहा कि इन चुनावों में जनता ने देश और समाज को जोड़ने वाली राजनीति को स्वीकार किया है । आपने एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था को चुना है जो धर्म निरपेक्ष है और जिसमें कई तरह की विचारधाराएं शामिल हैं । उन्होंने इसे नये युग की शुरुआत करने वाला जनादेश भी बताया।

 

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