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पांच हत्यारोपियों की सजा बरकरार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दो भाइयों की हत्या के पांच आरोपियों को निचली अदालत की ओर से सुनायी गयी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुये इन्हें जमानत देने से भी इंकार कर दिया। न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायाधीश इंदरमीत कौर की पीठ ने दो भाइयों की दीवाली के दिन हत्या किये जाने के  मामले में निचली अदालत द्वारा पांच आरोपियों को दोषी ठहराने और आजीवन कारावास की सजा सुनाने के फैसले को सही ठहराते हुये इनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने इसे गभीर अपराध करार देते हुये पांचों आरोपियों को जेल में ही रखने का आदेश दिया।

गौरतलब है कि आरोपियों धर्मपाल, प्रकाश, सुंदर, मुकेश और श्रीचंद ने 1995 में दीवाली के दिन राजधानी के संग्राम पार्क इलाके में दो भाइयों श्याम सुंदर और रामचंद्र की गला रेत कर हत्या कर दी थी। हत्या के इस संगीन मामले में निचली अदालत ने 2000 में पांचों को उम्र कैद की सजा सुनायी थी जबकि एक अन्य आरोपी महेन्द्र को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। महेन्द्र को बरी किये जाने को आधार बनाते हुए इन पांचों ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी । इनकी दलील थी कि महेन्द्र की तरह ही उन्हें भी संदेह का लाभ देते हुये बरी किया जाए।

अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि एक आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने के  कारण संदेह का लाभ अन्य सभी आरोपियों को नहीं मिल सकता। अदालत ने कहा कि सभी आरोपियों की अपराध में संलिप्तता का निर्धारण उनके खिलाफ मिले सबूतों के आधार पर किया जाता है। अदालत ने इसी आधार पर दायर की गयी जमानत याचिका को भी खारिज करते       हुए इन सभी को जेल भेजने का आदेश दिया।

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  • Web Title:पांच हत्यारोपियों की सजा बरकरार