DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पाक ने कबायली क्षेत्रों को दिया तोहफा

पाक ने कबायली क्षेत्रों को दिया तोहफा

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने देश में तालिबान की पकड़ वाले कबायली क्षेत्र में अनेक महत्वाकांक्षी राजनैतिक और न्यायिक सुधारों की घोषणा की है। इन सुधारों की घोषणा इस अराजक क्षेत्र को आतंकवादियों के कब्जे से मुक्त कराने और लोगों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से की गई है।

इस कदम को देश के लिए 63वें स्वतंत्रता दिवस का तोहफा करार देते हुए जरदारी ने कहा कि अब संघ शासित कबायली क्षेत्रों (फाटा) में लोगों की पहचान हो सकती है क्योंकि वे राजनैतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगे और अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

राष्ट्रपति ने गुरुवार देर रात राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि पाकिस्तान का भविष्य लोकतंत्र में निहित है और लोकतांत्रिक मूल्यों की देखभाल करने का हरेक पाकिस्तानी का अधिकार और कर्तव्य है।
 कबायली क्षेत्रों में पहले राजनैतिक गतिविधियां प्रतिबंधित थीं। वहां तालिबान और अलकायदा आतंकवादियों ने सुरक्षित ठिकाना पाया है।

जरदारी ने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करते हुए कानून में बदलाव कर दिया गया है। आतंकवादियों को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा करार देते हुए उन्होंने कहा कि वे हमारे समाज के ताने-बाने को ध्वस्त कर रहे हैं।

जरदारी ने कहा कि आतंकवादी बल प्रयोग के जरिए पाकिस्तान की जनता पर अपना राजनैतिक और वैचारिक एजेंडा थोपना चाहते हैं। वे राज्य, संविधान, लोकतंत्र और हमारी जीवनशैली को भी खारिज करते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि लोकतंत्र को वर्षों कुचला गया। उग्रवादी मानसिकता को बढ़ने की अनुमति दी गई। मैं इस बात में नहीं पड़ना चाहता कि किसने आतंकवादियों को पाला-पोसा और उनकी कैसे सहायता की गई।

आधिकारिक एपीपी संवाद समिति के अनुसार उन्होंने कहा कि दीर्घवधि में हमें निश्चित तौर पर आतंकवादी मानसिकता को पराजित करना चाहिए ताकि हम अपने देश, हमारे लोकतंत्र, हमारे संस्थानों और हमारी जीवनशैली की रक्षा कर सकें। राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने कहा कि कबायली क्षेत्र के लिए सुधार पैकेज को सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया और राष्ट्रपति भवन में बुधवार को हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने भी हिस्सा लिया था।

उन्होंने कहा कि राजनैतिक और न्यायिक सुधार के जरिए सदियों पुराने खतरनाक कानूनों में बदलाव पर ध्यान दिया गया है। इस कानून को फ्रंटियर क्राइम्स रेगुलेशन (एफसीआर) के नाम से जाना जाता है।
 उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन के बाद बिना जमानत के अधिकार के तहत मनमाने तरीके से हिरासत में लेने तथा गिरफ्तार करने की शक्तियों को कम कर दिया गया है। कानून में बदलाव के तहत फाटा न्याधिकरण की स्थापना पर भी ध्यान दिया गया है। इस न्यायाधिकरण को उच्च न्यायालय जैसी शक्तियां होगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पाक ने कबायली क्षेत्रों को दिया तोहफा