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आवेदकों की संख्या के चलते कंप्यूटरराईज्ड हो सकता है ड्रा

आवेदकों की भारी संख्या देखते हुए यमुना अथॉरिटी ने कम्प्यूटराइज्ड ड्रा  कराने का फैसला किया है। हालांकि अथॉरिटी ने इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन अथॉरिटी अपने ड्रॉ की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए कंप्यूटराइज कर सकती है। वर्ष 2003 में हुए चाई-फाई आवासीय घोटाले से सबक लेते हुए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने मैनुअल ड्रा की प्रथा चला दी है। तब से अब तक ग्रेनो के सभी रेजीडेंशियल ड्रा मैनुअल होते रहे हैं। लेकिन आवेदकों की संख्या ज्यादा होने से यमुना अथॉरिटी के लिए मैनुअल ड्रा कराने के आसार नहीं बन रहे हैं। दूसरी ओर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अथारिटी वर्ष 2004 में नोएडा और 2008 में डीडीए ड्रा घोटाला होने से यमुना अथॉरिटी कम्प्यूटराइजड ड्रा कराने को लेकर आशंकित है। क्योंकि डीडीए और नोएडा दोनों अथॉरिटी ने कम्प्यूटराइज्ड ड्रा निकाले थे।


यमुना अथॉरिटी के सीईओ ललित श्रीवास्तव के अनुसार अगर कम्प्यूटराइज्ड ड्रा की ही स्थिति बनती है तो ड्रा के प्रति पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। इसके लिए अथॉरिटी टीसीएस, इंफोसिस व विप्रो जैसी नामी कंपनियों के संपर्क में है। फिलहाल नोएडा-ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी के पास कम्प्यूटराइजड के लिए विशेष साफ्टवेयर डेवलप करने की व्यवस्था नहीं है। नोएडा अथॉरिटी ने वर्ष 2004 का कम्प्यूटराइजड ड्रा यूपी गवर्नमेंट के यूपी डेस्को से कराया था। ड्रा में घोटाला उजागर होने से यमुना अथॉरिटी यूपी डेस्को से ड्रा कराने के पक्ष में नहीं है। अथॉरिटी के सीईओ ललित श्रीवास्तव ने बताया कि इस संबंध में अगले सप्ताह कोई अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।

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