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ईसाई नेताओं ने कहा, भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र

ईसाई नेताओं ने कहा, भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र

कंधमाल और गुजरात में हुए दंगों के लिए भारत को वैश्विक मजहबी स्वतंत्रता के मामले में निगरानी सूची में रखने वाले अमेरिकी पैनल की एक रिपोर्ट को खारिज करते हुए उड़ीसा के आर्कबिशप सहित अन्य ईसाई नेताओं ने शुक्रवार को कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है।

कटक-भुवनेश्वर के आर्कबिशप रैफेल चीनाथ ने कहा कि भारत कथनी, करनी दोनों में धर्मनिरपेक्ष है। भारत की धर्मनिरपेक्षता को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय मजहबी स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने जो भी कहा है, वह हमारे देश के संविधान के खिलाफ है।
 

पिछले साल कंधमाल में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए आर्कबिशप ने कहा कि कुछ सांप्रदायिक तत्वों पर देश की धर्मनिरपेक्षता भारी है और शांति बहाल हो गई है। उन्होंने कहा कि किसी को भी एक देश की आधारभूत बातों को नहीं भूलना चाहिए, जो युगों से धर्मनिरपेक्षता के साथ उन्नति कर रहा है।

इसी तरह के विचार रखते हुए उड़ीसा अल्पसंख्यक फोरम (ओएमएफ) के अध्यक्ष स्वरूपानंद पात्र ने कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों को एक छोटा वर्ग नफरत का निशाना बनाता रहा है लेकिन बहुसंख्यक समाज के अल्पसंख्यक समुदाय के साथ अत्यंत हार्दिक और सहयोगात्मक संबंध हैं। एक अन्य संगठन उड़ीसा सेक्युलर फ्रंट ने कहा कि गुजरात में 2002 में भड़के दंगे और कंधमाल में 2008 में हुई हिंसा पीड़ादायी है लेकिन इससे भारत के मजबूत धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ता।

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