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18 पनबिजलीघरों का होगा निर्माण, 225 मेगावाट बिजली होगी उत्पादित

अब वरदान बनेगी कोसी। इसे अभिशाप की जगह वरदान बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। कोसी बेसिन में 18 स्थानों का चयन पनबिजली परियोजनाओं के लिए किया गया है। इन बिजलीघरों से 225 मेगावाट बिजली पैदा होगी। नीतीश सरकार बनने के बाद अबतक आधे दर्जन पनबिजलीघरों का निर्माण सफलतापूर्वक किया जा चुका है जबकि इतनी ही परियोजनाएं निर्माण के अंतिम दौर में हैं।

इस सफलता से उत्साहित होकर राज्य सरकार ने कोसी के 18 क्षेत्रों का चयन किया है। अगले चार से पांच वर्षो में इन परियोजनाओं को तैयार कर घर-घर बिजली पहुंचाने की योजना है।

ऊर्जा विभाग ने तमाम परियोजनाओं की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है और उसपर आगे की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। इन परियोजनाओं में 126 मेगावाट के डागमारा परियोजना के अलावा लगभग 100 मेगावाट की छोटी-छोटी 17 परियोजनाएं हैं। बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्ट्रिक कारपोरेशन (बीएचपीसी) के तत्वावधान में इसका निर्माण होना है।

इनमें 8 मेगावाट की बथनाहा फेज-एक और 4 मेगावाट की बथनाहा फेज-दो के अलावा 8 मेगावाट की परसा, 12 मेगावाट की अरार, 6 मेगावाट की मलहनवा-दौलतपुर, 8 मेगावाट की मनहारा, 14 मेगावाट की निर्मली, 6 मेगावाट की सतोखर, 3 मेगावाट की कटैया व अर्नामा, 4 मेगावाट की थम्बा, 3 मेगावाट की कोरीपट्टी, 4 मेगावाट की सिंघावन बाजार, 3 मेगावाट की जदिया व चितन्नी, 3 मेगावाट की डागमारा फेज-दो परियोजना शामिल हैं।

126 मेगावाट की डागमारा फेज-एक पर काम काफी आगे पहुंच चुका है जबकि छोटी पनबिजली परियोजनाओं की शुरूआत 8 मेगावाट की बथनाहा फेज-एक से होगी। अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड में स्थित यह परियोजना अगले तीन वर्ष में बनकर तैयार हो जाएगी।

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  • Web Title:वरदान बनेगी कोसी