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जन प्रतिनिधि जनता की सुध लें

जन प्रतिनिधि जनता की सुध लें

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शुक्रवार को निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को आगाह किया कि वे केवल चुनाव के दौरान ही नहीं बल्कि दो चुनावों के बीच की अवधि में भी जनता की सुध लें।

देश के 63वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि यदि हम प्रत्येक नागरिक को संसद औरविधानसभाओं के लिए प्रतिनिधि चुनने के पूर्ण अवसर प्रदान कर सकते हैं तो यह सुनिश्चित करना हमारा परम कर्तव्य बनता है कि चुनावों के बीच की अवधि में भी उनकी बात सुनी जाए।

उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधियों को यह नसीहत देते हुए आगे कहा कि प्रत्येक संसद सदस्य औसतन 13 लाख से अधिक मतदाताओं वालेनिर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह संख्या कुछ राष्ट्रों की आबादी से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों पर यहबड़ी जिम्मेदारी आ जाती है कि वे उन लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करें, जिन्होंने उन्हें चुना है।

प्रतिभा पाटिल ने जन प्रतिनिधियों के साथ ही अधिकारियों की भी खबर ली। उन्होंने जन सेवाओं को प्रभावी ढंग से प्रदान करने के लिए शासन में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रशासकों को लोगों की आवश्यकताओं के प्रति सचेत होना चाहिए। उनका कार्य एक जनसेवा हैतथा निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी उनके कार्य की पहचान होनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि जब कल्याणकारी योजनाओं के लिए रखा गया धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है तो इससे आक्रोश होता है। उन्होंने कहा कि लोग चाहे गांव में हों या शहरों में, उन्हें निर्धारित सुविधाएं और सहूलियतें सुचारू रूप से तभी मिल पाएंगी, जब शासन व्यवस्था प्रभावी हो, जटिल न हो, अधिक पारदर्शी और जवाबदेह हो। लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने के लिए उनका ( योजनाओं का)  उचित स्तर तक कार्यान्वयन करना होगा।

प्रतिभा पाटिल ने आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह शांतिपूर्ण सह अस्तित्व और सभी धर्मों और आस्था के सिद्धांतों के खिलाफ है। अत: इसे जड़ से मिटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कति में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व का सिद्धांत रचा बसा है। आतंकवाद, जो मासूम लोगों को निशाना बनाता है, वह शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के विपरीत है। यह निन्दनीय है क्योंकि यह सभी धर्मों और आस्था के सिद्धांतों के खिलाफ है। शांतिपूर्ण समाज और विश्व निर्माण के लिए इसे मिटा देना चाहिए। यही मानव जाति के हित के सामूहिक लक्ष्य के लिए जरूरी है और हमें इस लक्ष्य को पाने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए क्योंकि संपूर्ण मानव जाति की नियति एक है।

राष्ट्रपति ने सौहार्द और शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को भारत की सभ्यता का मूल अंग बताते हुए कहा कि अगर हम अपने मूल्यों पर नहीं चलेंगे तो हम राह से भटक जाएंगे। ये उन संदेशों की तरह है जो सभी काल और युगों में प्रासंगिक रहे हैं। ये कभी पुराने नहीं पड़े हैं इसलिए प्रगति के दौरान हमें इन्हीं मूल्यों से वैसी ही ताकत मिलेगी, जिस प्रकार हमारे समूचे इतिहास के दौरान मिलती रही है। उन्होंने कहा कि प्रगति की ओर बढ़ते भारत को शांति और सदभावना की संस्कृति के आधार पर अपने भविष्य का निर्माण करना होगा। श्रेष्ठ परंपरा और प्रगति में सामंजस्य होना चाहिए।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि तरक्की करने के लिए सांप्रदायिक सदभाव का धागा सबके मन में रहना जरूरी है। अगर हम नफरत, अविश्वास और संवेदनहीनता की भावनाओं में फंस जाएंगे तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। उन्होंने देशवासियों का आहवान किया,  हम खास तौर से फूट डालो और राज करो की नीति से पैदा हुए प्रवृत्तियों के खिलाफ लड़ें। मैं प्रत्येक धर्म-  हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और दूसरे सभी धर्मों के अपने भाइयों और बहनों से कहना चाहूंगी कि वे मिलकर रहें।

मानसून की कम बारिश का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष मानसून सामान्य से कम रहा है। इससे कृषि और जल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हमें इस स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। देश-दुनिया में फैले स्वाइन फ्लू के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार आवश्यक कदम उठा रही है लेकिन इन क्षेत्रों में सरकार के प्रयासों और विकास प्रक्रिया में सहयोग के लिए नागरिकों को भी आगे आकर योगदान देना चाहिए।

प्रतिभा पाटिल ने भारत को सुदढ़ आधार देने के लिए लोकतंत्र, समावेशी आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तीकरण और हमारी सभ्यतागत धरोहर पर आधारित मूल्यों को चार जरूरी स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि इनमें से प्रत्येक का अपना महत्व है और एक स्थिर और प्रगतिशील राष्ट्र के लिए ये चारों स्तंभ समान रूप से मजबूत होने चाहिए। वैश्विक आर्थिक मंदी के बारे में राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक मंदी के प्रभावों से निपटने के लिए हमें अपनी अर्थव्यवस्था को संभालना तो होगा ही, साथ ही अपने विकास की उच्च गति को भी बनाए रखने का प्रयास करना होगा।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि हमारा घरेलू बाजार विशाल है और हमारे पास अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की शक्ति है। देश भर में बुनियादी सुविधाओं के निर्माण और ग्रामीण विकास पर ध्यान देने के साथ साथ विकास के नए क्षेत्रों का विस्तार करने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।

प्रतिभा पाटिल ने कहा कि विकास की हमारी गाथा में सभी के लिए अवसर और सम्मानपूर्ण जीवन के लिए स्थान होना चाहिए। सामाजिक सशक्तीकरण के लिए अथक कार्य करना होगा और राष्ट्रीय चेतना में इसका मुख्य स्थान होना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ने के लिए सभी को समान अवसर देना भारत की निष्ठा का सिद्धांत है और एक समावेशी समाज का निर्माण करना हमारा उद्देश्य है।

भावी विश्व के लिए तैयार रहने का आह्वान करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे विश्व की रूपरेखा नव प्रवर्तनों, तकनीकी और उद्यम भावना से तैयार होगी। भारत ज्ञानपूर्ण अर्थव्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी और उससे जुड़े क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। हम विश्वासपूर्वक भविष्य का सामना करने के लिए तैयार हैं लेकिन हमें इसमें कोई शिथिलता नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अनुसंधान एवं विकास के उच्च मानदंड स्थापित कर सकता है ताकि एक प्रबुद्ध समाज में ये मानदंड अंतरराष्ट्रीय बन जाएं। विश्व भारत से दुनिया की एक विशाल अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद करता है।

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