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कोतवाल पर लगाया गया पचास हजार रूपये का जुर्माना

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के त्वरित अदालत ने डकैती के एक मामले में बार-बार सम्मन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश न होने के कारण वहां के तत्कालीन कोतवाल योगेंद्र प्रसाद शुक्ल को छह घंटे की न्यायिक अभिरक्षा में रखने की सजा सुनाई है तथा पचास हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है ।


न्यायाधीश मनोज कुमार शुक्ल ने यह भी आदेश दिया है कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में कोतवाल को सात दिनों के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी । जौनपुर जिले के प्रधान डाकघर में 11 सितंबर 2007 की रात लाखों रुपये की लूट हुई थी । विवेचना के दौरान सात आरोपियों के नाम प्रकाश में आए। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी कर एक लाख रूपये से अधिक बरामद कर लिये थे। इस मामले का मुकदमा त्वरित अदालत (चतुर्थ) में विचाराधीन है ।
    

मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्थानीय सिगरा थाना प्रभारी के रूप में तैनात योगेंद्र प्रसाद शुक्ल को अदालत में साक्ष्य के लिए तलब किया गया था। कई तारीखें दी गई लेकिन तत्कालीन कोतवाल अदालत में हाजिर नहीं हुए। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए पिछले दिनों गैर जमानती वारंट जारी कर दिया और पुलिस को आदेश दिया कि शुक्ल को गिरफतार कर अदालत में पेश किया जाए ।
   

इस बीच अदालत में पेशी पर अदालत ने शुक्ल को छह घंटे की न्यायिक अभिरक्षा में रखने का आदेश दिया । शुक्ल को अगले दिन की गवाही के लिए जेल भेजने की तैयारी होने लगी जिस पर तत्कालीन थानेदार के पसीने छूट गये ।

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