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विदेशी प्लेट, देसी टेस्ट

विदेशी प्लेट, देसी टेस्ट

हम भारतीय स्वाद और स्वागत दोनों में आगे हैं। घर आए मेहमानों को तरह-तरह की चीजें बना कर खिलाना हमें अच्छा लगता है तो खुद भी देश-विदेश के व्यंजनों का स्वाद लेने में पीछे नहीं रहते। देसी स्वाद से हम ऐसे जुड़े हैं कि विदेशों में भारतीय व्यंजनों की बढ़ती लोकप्रियता हमें गौरवान्वित कर देती है। यही वजह है कि जब कभी अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारतीय खाने की तारीफ करती हैं या राष्ट्रपति ओबामा व्हाइट हाउस की पार्टी के मेन्यू में भारतीय समोसे शामिल करते हैं या फिर ब्रिटेन के राष्ट्रीय व्यंजनों की सूची  में भारतीय करी और तंदूरी चिकन टिक्के की खबरें अखबारों में आती हैं तो हम खुशी से फूले नहीं समाते। ऐसे में जब कोई विदेशी मेजबान हमारी ही धरती पर हमें देसी व्यंजन परोसता है तो हमारी नजरों में छाने के लिए उसे प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।

देसी स्वाद के प्रति भारतीयों की इसी दीवानगी का ही परिणाम है कि भारत में अपना कारोबार बढ़ाने में जुटी मल्टीनेशनल फूड चेन्स यहां अपने रेस्तरां के मेन्यू में बदलाव करने को मजबूर हैं। बरिस्ता, कॉफी कैफे डे, मैकडॉनल्ड, पीत्जा हट, केएफसी, डॉमिनोज, रूबी ट्यूजडे, टीजीआई फ्राइडे आदि के मेन्यू में न सिर्फ देसी व्यंजनों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि वे अंतर्राष्ट्रीय व्यंजनों को भी देसी टेस्ट के साथ परोस रहे हैं। बरिस्ता के भारत में मार्केटिंग एंड प्रोडक्ट डेवलपमेंट प्रमुख विशाल कपूर कहते हैं, ‘कॉफी, पीत्जा और बर्गर बेच रही अंतर्राष्ट्रीय फूड चेन्स भारत में अच्छा कारोबार कर रही हैं, पर मसाले और चटपटा खाने के शौकीन भारतीय ग्राहकों का दिल जीतने के लिए मेन्यू को स्थानीय टेस्ट के अनुकूल बनाना बेहद जरूरी है।’

मार्केटिंग स्ट्रैटजी
मैकडॉनल्ड के मैनेजिंग डाइरेक्टर विक्रम बक्शी के अनुसार, ‘किसी भी फूड आउटलेट का पहला उद्देश्य ग्राहकों को संतुष्ट करना होता है। खासतौर पर किसी मल्टीनेशनल फूड चेन के लिए जगह विशेष के स्वाद को सर्व करना एक सफल मार्केटिंग स्ट्रैटजी होती है। मैक आलू टिक्की बर्गर, वेज सरप्राइज और पीत्जा मैक पफ पूरी तरह भारतीय टेस्ट को ध्यान में रख कर सर्व किए जा रहे व्यंजन हैं। हाल में कंपनी द्वारा शुरू किए गए  ब्रेकफास्ट मेन्यू में रखी गई वेज और नॉनवेज सभी चीजें पूरी तरह भारतीय हैं।  स्थानीय स्वाद को ध्यान में रखने के कारण ही पीत्जा हट द्वारा गुजरात के पश्चिमी हिस्से में पूरी तरह शाकाहारी रेस्तरां भी खोले गए हैं, जिससे मारवाड़ी-जैन समुदाय की जरूरत को पूरा किया जा सके। बरिस्ता के विशाल कहते हैं ‘हालांकि बरिस्ता में कॉफी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुरूप सर्व की जाती है, पर जहां सवाल खाने की चीजों का आता है, वहां लोकेशन और स्थानीय स्वाद को ध्यान रखा जा रहा है। हाल में मैसूर हाइवे पर शुरू किए गए बरिस्ता आउटलेट में सांभर-डोसा, इडली व वड़ा और आलू का परांठा भी सर्व किया जा रहा है। मूर्थल में भी इसी तरह का स्पेशल आउटलेट खोलने की योजना है। सैंडविच, रोल, कटलेट्स आदि का नाम व लुक भले ही इंटरनेशनल है, पर फिलिंग भारतीय टेस्ट के अनुरूप ही होती है।’

इस कड़ी में केएफसी, यम रेस्टोरेंट, इंडिया का उदाहरण भी लिया जा सकता है। सन् 2004 में कंपनी द्वारा केएफसी की  रीलांच स्ट्रैटजी में प्रमुख रूप से मेन्यू के भारतीयकरण पर जोर दिया गया। गर्म और कुरकरेपन के शौकीन भारतीयों के टेस्ट के अनुरूप जब कंपनी ने भारत में हॉट एंड क्रिस्पी चिकन का विज्ञापन पेश किया तो कंपनी की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। फूड एक्सपर्ट नीता मेहता कहती हैं कि इस रणनीति का एक बड़ा कारण भारतीय फूड आउटलेट्स द्वारा दी जा रही टक्कर भी है। हल्दीराम, निरूलाज और बीकानेरवाला आदि के आउटलेट्स क्वालिटी व स्वच्छता आदि पैमानों पर अंतर्राष्ट्रीय चेन्स को अच्छी टक्कर दे रहे हैं। 

फ्यूजन का है जमाना
नीता के अनुसार आज फ्यूजन का जमाना है। हमारे टेस्ट बड्स भारतीय हैं, इसलिए अधिकतर लोगों की पसंद भारतीय जायका ही होता है। कंपनियां ग्राहक की प्रत्येक बारीकी को ध्यान में रख रही हैं। स्थानीय मसाले और मिर्ची का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेयोनीज और अन्य तरह की सॉस में अंडे का इस्तेमाल नहीं होता। विदेशों की तुलना में भारतीय अधिक चटपटा, कुरकरा, मसालेदार और तीखा पसंद करते हैं। भारत में सर्व किए जाने वाला पास्ता अधिक स्पाइसी होता है। इसी तरह यहां सर्व किए जाने वाले पीत्जा में भी  स्वाद और टॉपिंग्स दोनों  के स्तर में अंतर देखने को मिलता है। चना पीत्जा, पनीर टिक्का पीत्जा, चिकन टिक्का पीत्जा आदि पीत्जा का भारतीयकरण ही है। यहां लोग पीत्जा लाल टमाटर सॉस के साथ खाना अधिक पसंद करते हैं। जहां विदेशी खाने में तीखापन ना के बराबर होता है तथा खाने में कई तरह की हर्ब्स व पेपरिका (हल्की तीखी मिर्च) का  इस्तेमाल होता है, वहीं भारत में लाल मिर्च का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। ग्रेवी मे सफेद का जगह लाल ग्रेवी पसंद की जाती है।?

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