class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दो टूक

गुरुवार को राजधानी में जन्माष्टमी की शोभायात्रा में स्वाइन फ्लू की झांकी निकली। भीतर के पृष्ठ पर छपी इस झांकी की तस्वीर जरा ग़ौर से देखिए। ये वास्तव में हमारी उत्सवधर्मिता की झांकी है। पर्व-त्योहारों के आनंद में डूबकर गरीबी और बीमारी को भुला देने वाले जज्बे की झांकी है।

एक महामारी को भी मखौल बनाने वाली विनोदप्रिय संस्कृति की झांकी है। वे शहर दूसरे होंगे जिन्होंने स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए। वे मुहल्ले दूसरे होंगे जहां लोग घरों में कैद होकर बैठ गए। यहां तो पिछले बरस की तरह हर गली में बालगोपाल झूला झूल रहे हैं। मंदिरों में भी वसी ही चहल-पहल है। महामारियों से निपटने की सम्यक राह भी यही है। बिना घबराए-बौखलाए, बिना दिनचर्या की रफ्तार रोके, सावधानी और विवेक से जीवन को बहने देना। आनंदभाव को जीवित रखना।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दो टूक