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झारखंड : नरेगा के अमल पर राज्यपाल संतुष्ट नहीं

झारखंड में अभी राष्ट्रपति शासन है। के. शंकरनारायणन नए राज्यपाल बनकर आए हैं। उनके सामने सूखाग्रस्त राज्य की समस्याओं से निपटने की चुनौती है। सरकार ने बरसात की चिंताजनक स्थिति देखते हुए पहले चार जिलों, फिर सात और अंत में राज्य के संपूर्ण जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया।

झारखंड में सूखे की काली छाया जून खत्म होते ही मंडराने लगी थी। जुलाई आते-आते स्थिति साफ हो चुकी थी कि मानसून धोखा देगा। थोड़ी बहुत उम्मीद बची भी थी लेकिन जुलाई के तीसरे सप्ताह आते-आते यह बिल्कुल साफ हो चुका था। इसके बाद सरकार हरकत में आई।

के. शंकरनारायणन ने सूखा और राज्य में चलाए जा रहे राहत कार्यो के संबंध में कहा - सूखा राहत सरकार की प्राथमिकता सूची में है। खाद्य आपूर्ति, नरेगा, पेयजल एवं स्वच्छता, कल्याण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार तेजी से काम करेगी। भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। मेरे कार्यकाल में सब कुछ पारदर्शी रहेगा।

नरेगा के क्रियान्वयन पर असंतोष जहिर करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह क्षेत्र का दुर्भाग्य है कि सिर्फ 27 प्रतिशत लोगों तक ही नरेगा योजना पहुंच पाई है। अफसरों के कामकाज पर भी राज्यपाल ने असंतोष जताया। सुखाड़ घोषित करने के बाद अधिकारियों को अविलंब राहत कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार से 391 करोड़ रुपए तत्काल सूखा राहत के लिए मांगा है।

राज्यपाल के निर्देश पर राज्य के अंदर गरीबी रेखा से नीचे रहनेवालों को मुफ्त अनाज बांटने का काम शुरू हो चुका है। वृद्धावस्था पेंशन भी युद्ध स्तर पर बांटा गया। बैंकों से किसानों को ऋण राहत देने का निर्देश दिया है।

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