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कर्ज माफी के फैसले से यूपीएफसी की और दुर्गति

सरकार ने उत्तर प्रदेश वित्त निगम के 1594 करोड़ रुपये माफ कर दिये हैं। इसके चलते दूसरों को पैसा बांटने वाली यूपीएफसी आज खुद पैसा मांगने के कगार पर खड़ी है। राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की गलत योजनाओं के चलते उत्तर प्रदेश वित्त निगम की बर्बादी थमने का नाम नहीं ले रही है। आज नोएडा के सेक्टर-6 स्थित यूपीएफसी के क्षेत्रीय कार्यालय में उंगलियों पर गिन लेने वाले लोग, दशकों पुरानी कुर्सियां एवं मेज और दीमक खाती फाइलें ही मिलेंगी।


यूपीएफसी की पहले से हालत पतली चल रही थी लेकिन अब यूपीएफसी की हालत इतनी खराब हो चली है कि निगम में तालाबंदी की नौबत भी आ गई है। यूपीएफसी ने पिछले कई वर्षो से न तो किसी भी औद्योगिक इकाइयों को न तो लोन दिया और न ही किसी से रिकवरी की। निगम ने पिछले दो साल से किसी भी प्रकार का कोई भी वित्तीय काम नहीं किया है। ऐसे में सरकार का कर्ज माफी का फंडा निगम को और बर्बादी की तरफ ढकेल रहा है। सभी सरकारों ने अपने निजी और राजनीतिक फायदे के लिए ही निगम को इस्तेमाल किया।1990 के बाद कभी भी निगम के सुधार के लिए कुछ नहीं किया। निगम में 1990 के बाद से स्पेशल एंट्री के अलावा किसी को भी निगम में नौकरी नहीं मिली है। कर्मचारी निगम को छोड़-छोड़ कर जा रहे है लेकिन इनकी जगह पर किसी व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया गया। इसके चलते निगम की हालत दिन पर दिन खराब होती जा रही है।


क्षेत्रीय प्रबंधक बीएम अग्रवाल निगम की बदहाली और समस्याओं से खुद भी तंग आ चुके हैं। आलम यह है कि समस्याओं को लेकर उन्हें कुछ भी सुनना व बोलना गवारा नहीं रह गया है। वे कहते हैं कि दो महीने बाद मैं तो रिटायर हो जाऊंगा, हो सकता है कि मेरे रिटायर होने पर ही निगम का कुछ भला हो सके।

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