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निवेश और टैक्स

कई बार ऐसे मौके आते हैं जब टैक्स के नजरिए से निवेश की अनदेखी हो जाती है। यह इसलिए होता है क्योंकि उसका सीधा संबंध बैंक खाते से नहीं होता। बैंक खातों में उतार-चढ़ाव दिख जाता है पर निवेश के उतार-चढ़ाव पर नजर आमतौर पर नहीं रखी जाती। इसका एक उदाहरण है किसी एक म्यूचुअल फंड की स्कीमों के बीच निवेशक द्वारा किया गया स्विच। इस पर टैक्स तो लगेगा ही और पूरे निवेश को एक नए रूप में देखा जाएगा।

स्विच की अवधारणा
निवेशक को स्विच की अवधारणा अच्छी तरह से समझनी होगी। इस मामले में निवेशक एक स्कीम से दूसरी स्कीम में चला जाता है। यह उसी म्यूचुअल फंड के अंदर किया जाता है और किसी भी अन्य स्कीम में जाया जा सकता है। इसमें डेट और इक्विटी में जाने की किसी तरह की कोई बंदिश नहीं होती। यह निवेश के उद्देश्य की पूर्ति के लिए होता है और इसे स्कीम स्विच करना कहा जाता है। आपके खाते में कोई पैसा न आने पर भी टैक्स की देनदारी बनती है। इस पूरी ट्रांजेक्शन को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला हिस्सा वह, जब पैसा स्कीम से बाहर आया इसे बिक्री माना जाएगा जिस पर कैपिटल गेन या लॉस की गणना की जाएगी।

स्विच पर नजर रखें
- कई बार निवेशक एक ही म्यूचूअल फंड की स्कीम में स्विच करता है।
- कोई भी बैंक लेन-देन शामिल नहीं होता।
- कई बार टैक्स की गणना में इस तरह के स्विच की गणना होने से रह जाती है।
- स्कीम से बाहर निकलना बिक्री कहलाता है और इस पर कैपिटल गेन या लॉस की गणना होती है।

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  • Web Title:निवेश और टैक्स