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सीआईडी नहीं दायर कर सकती चार्जशीट

सीआईडी किसी मामले में चार्जशीट (आरोपपत्र) दायर नहीं कर सकती है। अनुसंधान का काम पूरा करने के बाद उसे सभी तथ्यों को पुलिस को सौंपना होगा। पुलिस द्वारा ही आरोपपत्र दायर किया जा सकता है। सोमवार को पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति चन्द्रमोहन प्रसाद की एकलपीठ ने यह अहम फैसला दिया। अदालत ने यह भी कहा कि सीआईडी की ओर से दायर आरोपपत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। मामला सारण जिला के मशरख थाना से जुड़ा है। शशिभूषण सिंह हत्याकांड का मामला पहले पुलिस के पास था, लेकिन बाद में डीजीपी के आदेश पर इसे सीआईडी को सौंप दिया गया। सीआईडी ने जांच कर कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया। इस हत्याकांड के आरोपी लालू ठाकु र ने सीआईडी की ओर से दायर आरोपपत्र को आपराधिक रिट याचिका दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दे दी।ड्ढr ड्ढr ठाकुर के अधिवक्ता एसबीके मंगलम ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(ओ), 36 तथा 173(2) की ओर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि इन धाराओं के तहत सीआईडी किसी मामले का अनुसंधान तो कर सकती है, लेकिन उसका कोई अधिकारी आरोपपत्र दायर नहीं कर सकता। आरोपपत्र दायर करने का काम पुलिस का है। उनका यह भी कहना था कि सीबीआई एक स्वतंत्र एजेंसी है, उसे अनुसंधान के साथ आरोपपत्र दाखिल करने तथा ट्रायल का अधिकार है। लेकिन सीआईडी राज्य सरकार की एक इकाई है, जो पुलिस विभाग के तहत आती है। राज्य सरकार किसी आपराधिक मामलों की जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंप सकती है, लेकिन जांच पूरा होने के बाद आरोपपत्र संबंधित थाना के आईओ के हस्ताक्षर से दी दाखिल किया जा सकता है। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(ओ), 36 व 173(2) की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि सीआईडी किसी भी मामले में अनुसंधान की कार्रवाई कर सकती है, लेकिन अनुसंधान के बाद आरोपपत्र पुलिस ही दायर करगी। अदालत ने आवेदक की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका को मंजूर कर लिया।ड्ढr ड्ढr लोकहित याचिका दायर : हायर ज्यूडिसियरी में आरक्षण का लाभ दिए जाने के लिए पटना हाईकोर्ट में एक लोकहित याचिका दायर की गई है। अर्जी की प्रति हाईकोर्ट सहित वीपीएससी तथा राज्य सरकार को दी गई है। विदित है कि राज्य में अभी न्यायिक पदाधिकारियों की बहाली में एसी, एसटी को आरक्षण का लाभ दिया जाता है। ओबीसी आरक्षण के दायर में नही आते। उसी प्रकार दायर ज्यूडिसियरी में ओबीसी को आरक्षण का लाभ देने का कोई प्रावधान नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ज्यूडिसियरी में आरक्षण लाभ देने के बार में एक कानून बना कर हाईकोर्ट को भेज दी है। अब हाईकोर्ट को इस बार में फैसला लेना है।

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