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जो नदियों को प्रदूषित करेगा, वह हर्जाना देगा

उत्तर प्रदेश जल प्रबंधन एवं नियामक आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष एच.एल.बिरदी पानी की बरबादी और उसके प्रदूषित होने पर काफी चिन्तित हैं। जल ही जीवन है के मूलमंत्र के साथ इस नवगठित आयोग की जिम्मेदारी सम्भालने वाले रिटायर्ड आई.ए.एस. श्री बिरदी कहते हैं- पानी का बेजा इस्तेमाल अब खतरनाक हद तक पहुँच रहा है।

अभी हम इसकी गम्भीरता नहीं समझ रहे। आबादी बढ़ने के साथ ही पानी की खपत भी बढ़ रही है। खेती के अलावा औद्योगिक और कारोबारी इस्तेमाल में भी पानी का खूब दोहन हो रहा है खासतौर पर भूगर्भ जल का। इसके अलावा पेयजल की ज़रूरत तो सर्वोच्च प्राथमिकता पर है ही। मगर इन सारी अहमियत के बावजूद अभी पानी की बरबादी रोकी नहीं जा पा रही है और न ही लोग इसके लिए जागरूक ही हो रहे हैं।

बुधवार को पद की शपथ लेने के बाद गुरूवार को हिन्दुस्तान से खास बातचीत में बिरदी ने कहा कि पानी का तर्कसंगत इस्तेमाल और जमीन के नीचे व नदियों तथा तालाब व पोखरों के पानी का समुचित प्रबंधन उनकी प्राथमिकता वाले बिन्दु होंगे। गंगा, यमुना और गोमती जैसी प्रमुख नदियों के बढ़ते प्रदूषण पर आयोग के सख्त नजरिए का संकेत देते हुए उन्होंने कहा- नदियों का प्रदूषण रोकने के लिए अब कुछ सख्त कदम उठाने होंगे।

इस प्रदूषण के लिए जो जिम्मेदार होगा उसे हर्जाना भुगतान करना होगा। आयोग राज्य में पानी के प्राकृतिक स्त्रोतों खासतौर पर पोखरों, तालाबों और नदियों की समुचित रख रखाव के लिए भी कुछ कदम उठाएगा। पक्की और पथरीली टाइल्स आदि लगाए जाने की वजह से कच्ची जमीन में वॉटर रीचाजिर्ग और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग भी सही ढंग से नहीं हो पा रही है, आयोग इस तरफ भी ध्यान देगा।

आयोग अभी शुरूआती दौर में ही है, अभी इसके सदस्य नामित होने हैं। जरूरत भर का स्टाफ भी तैनात होना है, फिलहाल सिंचाई विभाग के वाल्मी प्रोजेक्ट के साथ इस आयोग को भी जोड़कर काम शुरू हुआ है।

यह आयोग सिंचाई के अलावा शहरी विकास, भूजल बोर्ड, जल निगम, पर्यावरण आदि विभागों के साथ ही सामंजस्य बना कर काम करेगा। पूर्व आई.ए.एस. एच.एल.बिरदी  तीन बार यूपीएसआरटीसी के चेयरमैन रहने के अलावा  सामान्य प्रशासन, प्रशासनिक सुधार, विज्ञान एवं तकनीकी आदि विभागों में तैनात रहे। वे वर्ष 2006 में प्रशासनिक सेवा से रिटायर हुए।

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