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28 फरवरी, 2020|5:14|IST

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महिलाओं में बांझपन दूर करने की कवायद

नगर में अगले माह स्पर्म बैंक खोलने की तैयारी है। उद्देश्य यह कि बांझपन की शिकार महिलाओं को मातृत्व लाभ मिल सके। साथ ही इस चिकित्सा पद्धति में लगे डॉक्टर भी इस बैंक से स्पर्म डोनेशन का लाभ ले सकेंगे। लंदन के ‘लंदन वुमेंस क्लीनिक’ से प्रशिक्षण लेकर लौटीं स्त्री व बांझपन रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वर्णलता सिंह ने गुरुवार को चेतगंज स्थित नर्सिगहोम में मीडिया को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पूर्वाचल की कई स्त्री रोग विशेषज्ञों के पास औसतन एक महिला प्रतिदिन बांझपन की समस्या लेकर आती है। अधिकांश मामलों में जागरूकता के अभाव में रोगी के परिवार में स्पर्म डोनेशन की मानसिकता न होने से उनकी समस्या सुलझ नहीं पातीं। वाराणसी में पूर्व में भी सीमिति मात्र में (क्रायोप्रिज़र्वेशन) स्पर्म बैंकिंग की सुविधाएं शुरू हुई थीं लेकिन पर्याप्त सुविधा के अभाव में वह सफल नहीं रहे।

डॉ. सिंह ने बताया कि उनके नर्सिगहोम में सिंतबर माह से सीमित मात्र में स्पर्म बैंकिंग शुरू होगी। दिल्ली से सहयोग लेकर यह सुविधा मुहैया करायी जाएगी। किसी महिला का बांझपन दूर करने के लिए अन्य विधि की तुलना में स्पर्म डोनेशन की पूरी प्रक्रिया पूरी करने में महज चार से पांच हजार रुपये खर्च होंगे।

स्पर्म बैंक में सुरक्षित सीमेन उच्च कोटि का व एचआईवी मुक्त होता है। लंदन वुमेंस क्लीनिक दुनिया का सबसे बड़ा स्पर्म बैंक है। वहां साढ़े बारह हजार से अधिक स्पर्म वायल डीपफ्रीज स्थिति में हर समय उपलब्ध रहते हैं। साथ ही साड़े तीन हजार स्पर्म हर वक्त तैयार रहते हैं। सुरक्षित ढंग से रखा गया स्पर्म 25 साल तक खराब नहीं होता।

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  • Web Title:महिलाओं में बांझपन दूर करने की कवायद