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जेलों को भी मार गई महंगाई

बिहार की जेलों को भी महंगाई मार गयी। असर सीधा बंदियों के निवाले पर है। लिहाजा सरकार को बंदियों के भोजन मद की राशि में इजाफा करना पड़ा। जेल प्रशासन के अनुसार बंदियों को प्रतिदिन 24 रुपए के भोजन दिए जाते थे जिसे बढ़ाकर 27 रुपए कर दिया गया है। हालांकि अधिकारी मानते हैं कि महंगाई का असर बंदियों के भोजन की क्वालिटी पर नहीं पड़ा है। उन्हें पहले की तरह ही अरहर की दाल भी मिल रही है और चीनी भी।

प्याज और हरी सब्जियां भी दी जा रही हैं। अमूमन दिन के भोजन में चावल, दाल और सब्जी दी जाती है। सुबह के नाश्ते में अंकुरित चना के साथ गुड़ या फिर नमक और प्याज दिए जाते हैं। रात के भोजन में रोटी और सब्जी दी जाती है। वैसे सूत्रों की मानें तो जेलों में बाहुबली बंदियों के लिए यह पैमाना नहीं है। मांस के शौकीन दबंग बंदियों की इच्छा पर उनके मूड का व्यंजन मिल ही जाता है। वह चाहे उनके गुर्गे दे जाएं या फिर किसी और जरिए से उन तक पहुंच जाए।

कहा तो यह भी जाता है कि नए बंदियों पर दबंगई दिखाकर उनके परिजनों से मनचाहा व्यंजन भी मंगाते रहे हैं बाहुबली बंदी। खासकर नए अंडर ट्रॉयल बंदियों पर उनकी खूब चलती है। जहां तक सरकारी व्यवस्था का सवाल है तो बंदियों को सर्दी में ही मांसाहारी भोजन देने का प्रावधान है। ये बंदी साल के सात महीने शाकाहारी और पांच महीने मांसाहारी होते हैं। सर्दी शुरू होने पर ही बंदियों को सरकारी ‘मीट’ दी जाती है। अप्रैल से अक्तूबर तक उन्हें शाकाहारी भोजन ही दिया जाता है।

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