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नकली नोट डिजाइनों की सुरक्षा में ढिलाई का नजीताः सीबीआई

नकली नोट डिजाइनों की सुरक्षा में ढिलाई का नजीताः सीबीआई

भारत में नोट छापने में इस्तेमाल होने वाले गोपनीय टेंपलेट :नोटों पर अंकित डिजाइनों के फर्मों: के साथ कहीं न कहीं ढिलाई बरती गयी है, जिसकी वजह से बिल्कुल असली नोटों की तरह नजर आने वाले नकली नोट आ रहे हैं।

यह आकलन किसी और का नहीं नकली नोटों की जांच में लगी नोडल एजेंसी सीबीआई का है। सीबीआई ने अपने अधिकारियों, राजस्व खुफिया निदेशालय, भारतीय रिजर्व बैंक और सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के अधिकारियों की एक विशेष टीम का गठन किया है जो यह पता लगाएगी कि डिजाइन के साथ कैसे और किस स्तर पर समझौता किया गया है।

सीबीआई के निदेशक अश्विनी कुमार ने कहा कि हमारी जांच में यह बात सामने आई है कि नए डिजाइन के लिए 2005 गोपनीय सुरक्षित टेंपलेट की गोपनीयता के साथ समझौता किया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में अभी भी सुरक्षा टेंपलेट का इस्तेमाल हो रहा है, उन्होंने हां में जवाब दिया।

यहां समझौता शब्द के इस्तेमाल का आशय यह है कि नकली नोटों का कारोबार करने वालों को नोटों की छपाई में इस्तेमाल होने वाली विशेष स्याही, कागज और अन्य सामग्री के बारे में पूरी जानकारी है।

जांच दल की जानकारी देते हुए सीबीआई के प्रवक्ता हरीश भाल ने कहा कि इस विशेष टीम में सीबीआई, डीआरआई, आरबीआई और सीएफएसएल के अधिकारी शामिल हैं।

भाल ने कहा कि यह दल इस बात की जांच करेगा कि कैसे और किस स्तर पर इस सुरक्षा टेंपलेट के साथ समझौता किया गया। सूत्रों ने कहा कि करेंसी नोट छापने वाली स्याही और कागज का अभी विदेशों से आयात होता है। यह चिंता का विषय है।

जाली नोटों पर इसी माह कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस बैठक में आरबीआई, आईबी, डीआरआई, ईडी, सीबीआई और सीईआईबी, सीमा शुल्क विभाग और अद्धसैनिक बलों के अधिकारी शामिल हुए थे।

बैठक में फैसला हुआ कि जाली नोटों का मामला ब्रिटेन सहित यूरोपीय देशों के साथ उठाया जाएगा, जहां से स्याही और करेंसी पेपर का आयात किया जा रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ भी यह मसला उठाने का फैसला किया गया है। ज्यादातर नकली नोट भारत में पाकिस्तान से आते हैं।

सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जली नोटों का राष्ट्रीय डाटा भी तैयार कर रही है। समझा जाता है कि इससे जाली नोट छापने के स्थानों के अलावा यह भी पता चल सकेगा कि ये ज्यादातर किन इलाकों में चल रहे हैं।

इसके अलावा सरकार 500 रुपए का नोट छापने के लिए विशेष कागज तैयार करने जा रही है। देश में जाली नोटों में सबसे ज्यादा 500 के ही नोट होते हैं।

बैंकों को नकली नोट छांटने वाली मशीनें लगाने का निर्देश

देश में नकली नोटों के प्रसार पर अंकुश लगाने के उपायों के तहत रिजर्व बैंक ने बैंकों को अपनी शाखाओं में चरणबद्ध तरीके से नकली नोट छांटने वाली मशीनें लगाने का निर्देश दिया है।

रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक जे सदाकदुल्ला ने चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक के दौरान संवाददाताओं को बताया कि देश में सभी बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में नकली नोट छांटने की मशीनें लगाने का निर्देश दिया गया है जिससे बाजार में नकली नोटों के प्रसार पर रोक लगाई जा सके।

उन्होंने कहा कि इससे पहले बैंकों के करेन्सी चेस्ट को ही नकली नोट छांटने की मशीने लगाने की जरूरत थी, लेकिन अब बैंक की प्रत्येक शाखा को नोट छांटने की मशीनें लगानी होंगी।

वर्तमान में केवल करीब 4,000 करेन्सी चेस्टों के पास नोट छांटने की मशीनें हैं। उन्होंने कहा कि देश में करीब 70,000 शाखाएं हैं जिन्हें इन मशीनों को लगाने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि बैंकों को ये मशीनें चरणबद्ध तरीके से लगाने को कहा गया है।

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