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स्वाइन फ्लू: मास्क से बेहतर है साफ रुमाल

स्वाइन फ्लू: मास्क से बेहतर है साफ रुमाल

चेहरे पर मास्क पहन कर आप यह नहीं सोच लें कि आपने स्वाइन फ्लू से अपना बचाव कर लिया। मास्क से आप खुद को कोई सुरक्षा कवच नहीं प्रदान करते बल्कि अपनी छींक और खांसी से होने वाले संक्रमण से दूसरों को बचाते जरुर हैं।

देश में एच1एन1 फ्लू से अब तक कई लोगों की मृत्यु हो जाने तथा टेलीविजन पर आम लोगों को मास्क पहन कर सड़कों पर निकलता देख डर के चलते आम लोगों ने यह नहीं जानते हुए कि बाजार में जो मास्क बिक रहे हैं उनसे एच1एन1 से पूरी तरह से बच पाना संभव नहीं है। लोगों ने धड़ल्ले से मास्क खरीदे और अब यह हालत है कि बाजार से मास्क ही गायब हो गए हैं और मिल भी रहे हैं तो औनी- पौनी कीमत पर।
 
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक वीएम कटोच ने आम लोगों को बाजारों से मास्क गायब हो जाने की खबरों से नहीं घबराने की सलाह देते हुए कहा है कि आम लोग भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और अगर जाना भी पडे़ तो सर्जिकल मास्क या एन-95 मास्क की जगह एक बडे़ से रुमाल से मुंह ढांप लें। कटोच ने कहा कि आम लोगों को सर्जिकल मास्क या एन-95 मास्क पहनने की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग मास्क की जगह एक साफ रुमाल इस्तेमाल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मास्क के इस्तेमाल के बाद उसे नष्ट करने के लिए कई प्रकार के एहतियात बरतना बेहद जरुरी है इसलिए आम लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प साफ रुमाल है। उन्होंने कहा कि इस रुमाल को रोज धोकर धूप में सुखाने के बाद अगले दिन फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।
 
डॉक्टरों तथा एच1एन1 संक्रमित लोगों द्वारा मास्क के इस्तेमाल के बारे में डॉक्टर कटोच ने कहा कि एच1एन1 फ्लू का उपचार या जांच करने वालों या फिर किसी भी रुप में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वालों के लिए निर्धारित नियमों के अनुरुप मास्क का इस्तेमाल बेहद जरुरी है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों, अर्धचिकित्सा बलों तथा अस्पताल कर्मियों के लिए मास्क की कोई कमी नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी ऐसी कोई सलाह आम नागरिकों को नहीं दी है कि वे जब भी बाहर निकले मास्क पहने। बोस्टन के टफ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसन में इमरजेंसी मेडिसन के सहायक प्रोफेस मार्क मैन्ड्रियू का कहना है कि मास्क पहनने से स्वाइन फ्लू से जितना बचाव हो सकता है उससे कहीं अधिक बचाव बीमार या छींकने से खांसने वाले व्यक्ति से कम से कम तीन फुट की दूरी बनाए रखने और बार-बार हाथ धोने तथा साफ सफाई रखने से सुनिश्चित किया जा सकता है।

मास्क के इस्तेमाल के बारे में लेनसेट पत्रिका के संक्रामक रोग विशेषेज्ञ डॉक्टर जॉन मेककौनल का कहना है कि मास्क उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जिनको संक्रमण हो गया है क्योंकि मास्क पहनकर वे दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं पर इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि मास्क को हर रोज बदलने और उसे नष्ट करने में भी पूरी एहतियात बरतनी होती है।

लंदन के द बार्ट अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ जॉन ऑक्सफोर्ड का कहना है कि इस बात के बहुत कम प्रमाण मिले हैं कि मास्क वास्तव में फ्लू से सुरक्षा प्रदान करता है। उनका कहना है कि कोई भी मास्क विषाणुओं को सांस के साथ शरीर के भीतर जाने से शत प्रतिशत नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि मास्क पहनना गलत नहीं है क्योंकि इससे संक्रमण फैलाने से रोकने में मदद तो मिलेगी, लेकिन अगर कोई मास्क पहन कर यह समझने लगे कि उसने खुद को कोई सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है तो यह उसकी भारी भूल होगी।
 
उन्होंने कहा कि रेस्परेटर मास्क, सर्जिकल मास्क तथा एन-95 मास्क के अलावा भी कई तरह के साधारण मास्क दुनिया भर के बाजारों में बिक रहे हैं लेकिन रेस्परेटर मास्क के अंदर फिल्टर होते हैं जो सांस लेते समय कुछ कणों को सांस के साथ शरीर के भीतर जाने से रोकते हैं। इसीलिए रेस्परेटर मास्क सर्जिकल मास्क की तुलना में बेहतर माने जा सकते हैं।

क्वीन मेरी स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के जैव वैज्ञानिक डॉ. रोनाल्ड कटलर का कहना है कि यदि कोई मास्क पहन कर छींकता है तो मास्क छींक के साथ बाहर जाने वाले थूक के छोटे-छोटे कणों को सामने मौजूद किसी व्यक्ति पर गिरने से रोकेगा जिससे उस व्यक्ति में संक्रमण नहीं फैले।

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