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हम भी किसी से कम नहीं

हम भी किसी से कम नहीं

दो दिन बाद 15 अगस्त है। अब भारत विकसित देश बनने की कतार में है। पर इससे जुड़ी उपलब्धियों का श्रेय लजाता है, उन महान भारतीयों को, जिन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए हमें आज यहां तक पहुंचाया। दोस्तो, तिरंगा फहराना, आजादी के गीत गाने के साथ-साथ कुछ छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना शुरू कर दो। इन्हें लागू करने के बाद आप खुद कह उठोगे कि हां मैं भी एक सच्च देशभक्त हूं।

पानी की बचत
दोस्तो, ‘जल ही जीवन’ की पंक्ति तुमने सुनी होगी। बात बिलकुल सही है। बिन पानी के सचमुच जिंदगी नहीं है। पानी को इस्तेमाल योग्य बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है और बहुत-सा धन भी खर्च होता है। तुम जानते ही हो कि पृथ्वी पर 70 प्रतिशत जल है, लेकिन पीने लायक पानी सिर्फ1 प्रतिशत। अपनी कॉलोनी में बच्चों की टोली बना कर लोगों को जागरूक करना कि आज अगर अपनी आदतों में बदलाव नहीं करोगे तो कल हो सकता है तुम्हें एक गिलास पानी के लिए भी तरसना पड़े। घर में नलों की लीकेज के बारे में बताना, गीले कपड़े से गाड़ी साफ करना, पानी की बचत के लिए उपाय करना भी देश की प्रगति में साथ देना ही है।

राष्ट्रीय धरोहर की रक्षा
तुमने न्यूजपेपर या टीवी में पढ़ा व सुना होगा कि सरकार राष्ट्रीय धरोहरों पर बहुत धन खर्च कर रही है। कुछ लोग इन संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नही छोड़ते। कुछ अपना नाम ऐतिहासिक जगहों पर पत्थरों पर नाम उकेर देते हैं। दोस्तो, इन ऐतिहासिक धरोहरों को मूल स्वरूप में लाने के लिए एक ओर जहां धन खर्च होता है, वहीं कितनी भी कोशिश करने पर वह वास्ताविक स्वरूप नहीं पा सकते। इसलिए न सिर्फ खुद ऐसी आदतों से बचो, साथ ही दूसरों को भी ऐसा करते हुए तुरंत टोको। ऐसा करके भी तुम खुद पर भारतीय होने पर गर्व कर सकते हो।

सार्वजनिक संपत्ति का इस्तेमाल
तुम बस, ट्रेन, हवाई जहाज आदि की यात्रएं कभी न कभी जरूर करते हो। उनमें यात्र करते समय भी यही सोचो जैसे तुम अपने घर में कूड़ा यहां-वहां नहीं फेंकते और हमेशा कूड़ेदान तलाशते हो, उसी प्रकार यातायात के इन साधनों में भी हमेशा ख्याल रखो। बसों में लगे शीशों को मत तोड़ो। हो सकता है मौसम बरसात का हो और बाद में बैठने वाले यात्रियों को परेशानी हो। पार्क में फूलों को तोड़ कर सुंदरता कम न करना। सार्वजनिक संपत्ति का ख्याल भी अपनी संपत्ति की तरह करना भी देशभक्ति को ही दर्शाता है।

अनुशासन बनाए रखना
दोस्तो, तुम्हें अनुशासन का पाठ स्कूल में तो पढ़ाया जाता है। अनुशासन अपने जीवन में एक बार ढाल लिया जो वह पूरी जिंदगी के लिए साथ जुड़ जाता है। मसलन अगर तुम भी मैट्रो ट्रेन में अपनी बारी का इंतजार करते हो, किसी भी टिकट काउंटर में बारी से पहले झपट्टा मारकर आगे नहीं घुसते, जेब्रा क्रॉसिंग से ही हमेशा रोड क्रॉस करते हो, किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, तो तुम भी अपनी तरक्की के साथ देश की तरक्की में भी भागीदार होते हो।

ईमानदार बनो
कुछ लोग कैसी भी विपरीत स्थिति में ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ते। तुम्हारे कुछ दोस्त ऐसे होंगे, जो पूरे वर्ष मेहनत व लगन से पढ़ाई करते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं, जो सिर्फ और सिर्फ नकल पर यकीन करते हैं, चोरी छिपे टीचर की नजर बचा कर प्रश्न पत्र हल करने का प्रयास करते हैं। क्या वे आगे चल कर देश की तरक्की में हमसफर बन पाएंगे? नहीं। अभी से चीटिंग की आदत बड़े होकर भी उन्हें उसी रास्ते की ओर लेकर जाएगी, जो पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी सिर्ददी बनेंगे। अपना काम ईमानदारी से करना भी देश सेवा है।

पर्यावरण का रखें ख्याल
कागज पेड़ की देन हैं, अगली बार जब बेवजह कोई कागज खराब करो तो उससे पहले सोचना कि हमारे जीवन रक्षक पेड़ों का कहीं न कहीं बलिदान जरूर दिया जा रहा होगा। जहां तुम पैदल चल कर चंद मिनटों में पहुंच सकते हो, वहां पापा से गाड़ी में चलने की जिद मत करो। दोस्तो, एक लीटर पेट्रोल जलने से वातावरण में चार किलो कार्बन-डाई-ऑक्साइड पैदा हो जाती है। अगर तुम पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए छोटा सा ही सही एक प्रयास कर रहे हो तो तुम भी कह सकते हो कि हम भी किसी से कम नहीं।
हम भी किसी से कम नहीं

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