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सुखाड़-बाढ़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया फरमान

मेडिकल कॉलेजों के डाक्टर भी गांवों में नौकरी करेंगे। बाढ़ या सुखाड़ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में इनकी सेवा ली जाएगी। महामारी की रोकथाम में जिलों में डाक्टरों की कमी होने पर मेडिकल कॉलेजों के डाक्टरों की प्रतिनियुक्ति गांवों में की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने डीएम एवं सिविल सर्जन को यह अधिकार दिया गया है कि सूबे के छहों मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों की सेवा वे गांवों के लिए ले सकते हैं।

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, नालन्दा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जवाहलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अनुग्रह नारायण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कनीय चिकित्सक और स्नातकोत्तर के चिकित्सक गांवों में प्रतिनियुक्त होंगे। प्रभावित जिलों के डीएम और सिविल सर्जन संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अधीक्षक से इनकी सेवाएं लेंगे।

स्वास्थ्य विभाग का निर्देश है कि बाढ़ या सुखाड़ के दौरान जिन क्षेत्रों में महामारी के कारण पीड़ितों की संख्या ज्यादा होने की आशंका हो वहां के स्वास्थ्य उप केन्द्र, स्कूल, पंचायत भवन आदि सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी अस्पताल खोला जाए। महामारी के नियंत्रण होने तक यह अस्थायी अस्पताल चलेगा और वहां प्रतिनियुक्त डाक्टर और स्वास्थ्य कर्मी काम करते रहेंगे।

डीएम और सिविल सर्जन प्रचार-प्रसार के माध्यम से संभावित प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़-सुखाड़ से उत्पन्न बीमारियों से बचाव और उपचार के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाएंगे। स्वास्थ्य निदेशालय स्तर पर गठित कोषांग का यह दायित्व होगा कि आपातस्थिति में वह मॉनिटरिंग करेगा और दवा समेत अन्य संसाधनों की प्रभावित क्षेत्रों में कमी न हो, यह सुनिश्चित करेगा। विभाग के निदेशक प्रमुख सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए स्वतंत्र होंगे। 

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  • Web Title:मेडिकल कॉलेजों के डाक्टर भी अब गांव में करेंगे नौकरी