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एच1एन1 के लिए 16 प्रयोगशालाओं को सक्षम बनाया गया

सरकार ने घातक इंफ्लूएंजा एच1एन1 के तेजी से बढ़ रहे संक्रमण और उसके संदिग्ध रोगियों के नमूनों की जांच के लिए देश के विभिन्न भागों में 16 प्रमुख प्रयोगशालाओं का उन्नयन करके उन्हें जांच के लिए पूर्ण सक्षम बनाया है और निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाओं को भी नियंत्रण कार्यों में शामिल करने का फैसला किया गया।


केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद इंफ्लूएंजा निगरानी नेटवर्क में आने वाली प्रयोगशालाएं इस प्रकार हैं -:
राज्य प्रयोगशालाएं - महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ -एनआईवी, पुणे; तमिलनाडु- केआईपीएम, चेन्नई; उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, प. बंगाल, उड़ीसा, बिहार एवं झारखंड- एनआईसीइडी, कोलकाता; पूर्वोत्तर राज्यों- आरएमआरसी, डिब्रुगढ़; केरल- सीएमसी, विल्लोर; राजस्थान- वीपीसीआई, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और पंजाब- पीजीआई, चंडीगढ़।


देश में इस तरह की जांच के लिए पहले केवल दो प्रयोगशालाएं दिल्ली में राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी) और पुणो में नेशनल इंस्टिटयूट ऑफ वायरोलाजी (एनआईवी) उपलब्ध थी लेकिन इस रोग के तेजी से बढ़कर संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इस तरह की 16 और प्रयोगशालाओं को तैयार किया है।


राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान के तहत आने वाली प्रयोगशालाएं इस प्रकार हैं -: दिल्ली- राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान, दिल्ली; उत्तर प्रदेश- एसजीपीजीआई, लखनऊ; हिमाचल प्रदेश और हरियाणा-सीआरआई, कसौली; गुजरात- बीजे मेडिकल कालेज, अहमदाबाद; कर्नाटक और गोवा- एनआईएमएसएएनएस,बेंगलुरु; कर्नाटक- केएमसी, मणिपाल; शिमला और ऊपरी हिमाचल प्रदेश- आईजीएमसी, शिमला; आंध्र प्रदेश- आईपीएम, हैदराबाद; तमिलनाडु- जेआईपीएमईआर, पांडिचेरी; महाराष्ट्र- हाफकिंग संस्थान, मुंबई।


सूत्रों ने कहा कि निजी क्षेत्र की प्रयोगशालाओं के लिए मापदंड स्थापित किये गये है और कुछ शर्तें रखी गयी हैं जो उनका पालन करेंगी उनको ही शामिल किया जाएगा।

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