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class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शहर में सड़क धंसने का रहस्य गहराया

-नियमों को दरकिनार करके बनाई जाती हैं सड़कें
--पीडब्यलूडी के नियमों की अनदेखी
-ठेकेदारों के पास नहीं पूरी मशीनरी
-निगम के पास नहीं प्रयोगशाला


शहर में सड़क धंसने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हल्की बारिश में कौन सी सड़क कहां कब धंस जाए, कुछ नहीं पता। शहर की अंदरूनी सड़कों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक सड़क धंसने की घटना आम हो चली है। ऐसे हालात में पिछले वर्ष सेक्टर-21 में हुए टाटा सफारी हादसे की पुनरावृत्ति कभी भी हो सकती है। ट्रक को निगलने की क्षमता रखने वाले गड्ढे राहगीरों की जान के दुश्मन बने हैं। सबूत के तौर पर पॅाश क्षेत्र सेक्टर-24, सेक्टर-21, सेक्टर-28 में सड़क धंसने से बने गड्ढों को देखा जा सकता है। उधर, पानी की पाइप लाइन की लीकेज को ढाल बनाकर नगर निगम के अफसर सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाही से बचा रहा है।

किसी भी शहर का आइना मानी जाने वाली सड़कों से उसकी सुंदरता का आंकलन किया जाता है। बेहतरी के लिए निगम अपने सात सौ करोड़ रुपये के बजट का करीब आधा सड़कों के निर्माण व उनकी मरम्मत पर खर्च कर देता है। पीडब्ल्यूडी (सड़क व भवन) के नियमों को निगम अमल में लाता है। नियमानुसार सड़क बनाने से पहले वहां की मिट्टी की जांच जरूरी होती है। ताकि वजन सहन की क्षमता आंकी जा सके। प्रयोगशाला में इसके नमूने भेजे जाते हैं। मिट्टी को रोलर से प्रेस करना जरूरी होता है। इसके बाद चार इंच मोटी रोड़ी की दस से 18 इंच मोटी परत चढ़ाई जाती है। वजन सहने की क्षमता को देखते हुए रोलर से इसको प्रेस किया जाता है। पानी छिड़काव जरूरी है। छोटी कच्ची रोड़ी की परत होती है। आखिर में तारकोल किया जाता है। इस दौरान मिट्टी से लेकर, रोड़ी, तारकोल की जांच प्रयोगशाला में लाजमी है। आरोप है कि दो से तीन सौ करोड़ रुपये के कार्य करवाने वाले निगम के पास अपनी प्रयोगशाला नहीं है। ऐसे में बिना जांच के काम कर दिया जाता है। ठेकेदारों के पास पूरी मशीन नहीं हैं। प्रेस करने के लिए भारी रोलर नहीं है। यही वजह है कि हल्की बारिश में सड़कें धंस रही हैं। पिछले दिनों एनएच-दो चौक पर अचानक दस से 11 फुट सड़क धंस गई। अलग बात है कोई हादसा नहीं हुआ। मगर निगम अधिकारियों ने पानी की पाइप लाइन की लीकेज को इसकी घटना की वजह बता दिया।
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अधिकारी कहिन

निगम के एसई डीसी साहू का कहना है कि पीडब्लयूडी के नियमों पर सड़कों का निर्माण करवाया जाता है। निर्माण के दौरान निगम के अफसर जांच करते हैं। कमी पाए जाने पर सुधार करवाते हैं। छह महीने तक सड़क की मरम्मत की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। जो सड़क धंस रही हैं, वह पानी की पाइप लाइन लीकेज की वजह से हो रही हैं। समस्या सामने आने पर दूर करवाई जा रही हैं।

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