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दस लाख की आय पर कर सिर्फ 10 फीसदी!

दस लाख की आय पर कर सिर्फ 10 फीसदी!

आयकर दरों को नरम बनाने और प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) समाप्त करने जैसे प्रस्तावों सहित कर ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन के उददेश्य से सरकार ने बुधवार को नई प्रत्यक्ष कर संहिता का मसौदा जारी किया। इस पहल को देश में व्यक्तियों और कंपनियों की आय पर कर लगाने की पूरी प्रणाली में सुधार की बड़ी पहल माना जा रहा है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा जारी की गई इस संहिता में एक लाख 60 हजार रुपये तक की सालाना आय वाले व्यक्ति को आयकर से बिल्कुल मुक्त रखने, दस लाख रुपये तक की आय पर दस प्रतिशत की दर से तथा दस लाख से उपर 25 लाख रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत और 25 लाख रुपये से अधिक की सालाना व्यक्तिगत आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगाने का प्रस्ताव है।

फिलहाल एक लाख साठ हजार रुपये सालाना आय वाले को आयकर से छूट है लेकिन एक लाख साठ हजार रुपये से तीन लाख रुपये सालाना आय वाले को दस प्रतिशत कर देना होता है। तीन से पांच लाख रुपये आय वाले को 20 प्रतिशत और पांच लाख रुपये से अधिक आय वाले को 30 प्रतिशत आयकर देना पड़ता है।

मुखर्जी ने संहिता का मसौदा जारी करते हुए संवाददाताओं से कहा प्रस्तावि नए कर ढांचे में कर नियमों का बेहतर पालन और अधिक कर वसूली सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि संहिता पर भलीभांति चर्चा होने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र में एक विधेयक पेश किया जा सकता है। कर संहिता चार दशक पुराने आयकर कानून की जगह लेगी और इसके दायरे में संपत्ति कर सहित विभिन्न प्रत्यक्ष कर आएंगे।

कर संहिता में विवादास्पद प्रतिभूति लेनदेन कर को समाप्त करने का प्रस्ताव है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इस संहिता के लिए कार्य शुरू किया था। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने संहिता जारी करते हुए यहां कहा कि यह संहिता 1961 के आयकर एवं अन्य प्रत्यक्ष—कर कानूनों की जगह लेगी और इससे स्थिरता को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस संहिता के लागू होने के साथ ही मुकदमे कम होंगे और कर वसूली बढ़ने के साथ-साथ कर नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित होगा।

मुखर्जी ने कहा कि नई संहिता सरल कर ढांचा उपलब्ध कराएगी जो पूंजी प्राप्ति कर बचत योजनाओं और मुनाफा नहीं कमाने वाले संगठनों के लिए होगी। वित्त मंत्रालय संहिता के मसौदे के आधार पर नया अधिनियम बनाए जाने से पहले इस पर सभी सम्बद्ध पक्षों से सुझाव आमंत्रित करेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस संहिता को तैयार करने में काफी कड़ी मेहनत हुई है। इसे 1961 के आयकर कानून के संदर्भ में देखा जाना उचित नहीं होगा। मुखर्जी ने कहा कि लोग स्वेच्छा से कर अदायगी करें, इसे ध्यान में रखकर यह संहिता तैयार की गई है ताकि कर ढांचे को सरल बनाया जा सके।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस संहिता के जरिए क्षमता बढ़ाने और मौजूदा कर ढांचे की खामियों को दूर करने का लक्ष्य है। नई संहिता कराधान के स्वीकार्य सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय प्रचलन के अनुरूप है। इससे एकीकृत कर रिपोर्टिंग प्रणाली का रास्ता तैयार होगा और हमारे युवा तथा पेशेवरों की आकांक्षाओं की पूर्ति होगी।

प्रत्यक्ष कर संहिता में तीन लाख रुपये तक की बचत पर कर कटौती की दर बढ़ाने का प्रस्ताव संहिता में किया गया है। इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला पैसा कर मुक्त होगा बशर्ते उसे सेवानिवृत्ति लाभ खाते में जमा किया जाए। खातों से धन निकासी पर कर लगाया जाएगा ताकि दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित किया जा सके।

इसमें व्यवसायियों के लिए मौजूदा मुनाफा आधारित कर रियायतों को निवेश आधारित रियायतों में बदलने का सुझाव दिया गया है। संहिता में किसी कारोबार के पुनर्गठन की स्थिति में कर प्रावधनों को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव किया गया है। मुखर्जी ने कहा कि संहिता में कर प्रणाली को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कराधान को नरम बनाने तथा कर आधार बढ़ाने के उद्देश्य से इसे पेश किया गया है।

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