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राजधानी में वाहन 10 लाख, पार्किंग मात्र 20

राजधानी की आबादी 20 लाख पहुंच चुकी है। शहरी क्षेत्र में तीन लाख कार, पांच लाख दुपहिया, टेम्पो व रिक्शा-साइकिल मिलाकर तकरीबन दस लाख वाहन हैं। पार्किंग की व्यवस्था मात्र 20 स्थानों पर है। इस में टेम्पो स्टैंड भी शामिल हैं। राजधानी की ऐसी स्थिति होने के लिए बहुत हद तक पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (अब नगर निगम का योजना एवं विकास शाखा) दोषी है। वर्ष 1े पहले राजधानी के नियोजित विकास के लिए पटना सिटी नगरपालिका कार्यरत थी, जिसका क्षेत्र बांकीपुर तक फैला था।ड्ढr ड्ढr 1में ही शहर के सुनियोजित व नियंत्रित विकास के लिए पटना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (पीआईटी) का गठन हुआ था। 1से 1े बीच राजेन्द्र नगर, श्रीकृष्णापुरी, श्रीकृष्णानगर का कुछ इलाका व कंकड़बाग में पीआईटी कॉलोनी का कुछ हिस्सा विकसित किया गया। 1में पीआईटी पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार में तब्दील हो गया। इसके गठन के बाद कोई ठोस संगठित कार्य नहीं हुआ। इस दौरान विकास की योजनाएं तो बनीं, लेकिन कोई भी सकार रूप नहीं ले सकी। पीआरडीए निजी मकान, अपार्टमेंट और व्यावसायिक भवन का नक्शों स्वीकृत करने तक सिमट गया। नक्शा में विचलन कर निर्माण व पुराने भवनों में परिवर्तन धड़ल्ले से जारी रहा। इस दौरान पदाधिकारियों ने नियम में खामियों का फायदा उठाते हुए मनमाने तरीके से भवनों का नक्शा स्वीकृत किया। जब जो अधिकारी आये अपनी मर्जी से नक्शा पास करने का नियम बनाया। किसी ने यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि बिना पार्किंग के बनने वाले भवन भविष्य में एक भयानक स्थिति उत्पन्न करंगे, जिससे निबटना असंभव हो जायेगा।ड्ढr ड्ढr शहर की तमाम सड॥कों पर नीचे दुकान और ऊपर मकान हैं लेकिन पार्किंग नहीं है। अब लाख टके का सवाल यह है कि कार और दुपहिया से चलने वाले लोग अपनी गाड़ी कहां पार्क करं। ऐसे में सड॥क पर गाड़ी पार्क करना लोगों की मजबूरी है। टेम्पो चालक भी जहां मर्जी वहीं सड़क पर वाहन खड़ा कर सवारी का इंतजार करते हैं। रिक्शा चालकों का भी यही हाल है। ऊपर से फुटपाथ से लेकर सड़क तक अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। शहर में मिक्स ट्रैफिक भी यातायात जाम का एक महत्वपूर्ण कारण है। फ्रेार रोड, न्यू डाकबंगला रोड, एक्ाीबिशन रोड, भटाचार्या रोड, अशोक राजपथ, बारी पथ, बोरिंग रोड, बोरिंग कैनाल रोड नाला रोड समेत अन्य सड़कों पर नीचे दुकान और ऊपर मकान से बहुमंजिले व्यावसायिक भवन तक बने हैं। मकान व दुकानों की संख्या हाारों में है लेकिन पार्किंग चंद बहुमंजिले इमारतों में ही हैं। हालांकि पार्किंग भी महा दिखावा है। डाकबंगला चौराहा से लेकर भट्टाचार्या मोड़ तक दर्जन से भी अधिक व्यावसायिक भवन ऐसे हैं जिनमें पचास से कम दुकानें और कार्यालय नहीं हैं लेकिन इन भवनों में डेढ़ दर्जन से अधिक वाहन पार्क करने की जगह नहीं है।

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  • Web Title: राजधानी में वाहन 10 लाख, पार्किंग मात्र 20