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जिन्ना के ख्वाब में भी नहीं होगा ऐसा पाकिस्तान

जिन्ना के ख्वाब में भी नहीं होगा ऐसा पाकिस्तान

जिन्ना ने पाकिस्तान की आजादी के बाद अपने पहले भाषण में शांति एवं सदभाव, पड़ोसियों के साथ मित्रतापूर्ण नीति, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और आक्रमण नहीं करने के जो सिद्धांत रखे थे, पाकिस्तान उन पर बिल्कुल खरा नहीं उतरा।

धार्मिक आधार पर पाकिस्तान की स्थापना करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना निजी जिंदगी में एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति थे और विशेषज्ञों के अनुसार उन्हें इस बात का कतई कोई अंदेशा नहीं रहा होगा कि आने वाले समय में उनका देश तालिबानी पाकिस्तान में तब्दील हो जायेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार जिन्ना ने पाकिस्तान की आजादी के बाद अपने पहले भाषण में शांति एवं सदभाव, पड़ोसियों के साथ मित्रतापूर्ण नीति, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और आक्रमण नहीं करने के जो सिद्धांत रखे थे, पाकिस्तान उन पर बिल्कुल खरा नहीं उतरा। विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण उन सिद्धांतों में विरोधाभास है जिनके आधार पर पाकिस्तान का गठन किया गया।

इस्लामी विद्वान मौलवी वहदुद्दीन के अनुसार वह आजादी से पहले ही पाकिस्तान गठन के आंदोलन को देखते आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में उस समय नारा लगता था, पाकिस्तान का मतलब क्या, लाइलाहा इलल्लाहा। उन्होंने कहा कि जिन्ना ने धार्मिक आधार पर दो मुल्कों का सिद्धांत दिया था। उन्होंने कहा कि जब जिन्ना ने धार्मिक आधार पर पाकिस्तान बनाया था तो वहां सेक्यूलर विचार कैसे चल सकते हैं। इसलिए जिन्ना के विचारों और हकीकत में फर्क आना लाजमी है।

मौलाना वहददुद्दीन ने कहा कि जिन्ना या उनके समर्थकों को लगता था कि किसी जमीन का टुकड़ा मिलने या किसी एक धर्म के व्यक्तियों को जोड़ लेने से कोई मुल्क बन जायेगा। लेकिन मुल्क महज जमीन का टुकड़ा नहीं होता। गौरतलब है कि पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है ।

मौलाना ने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर के नाम पर उग्रवाद शुरू कर दिया। पाकिस्तान ने अपने सारे संसाधन भारत विरोधी अभियानों और सेना को मजबूत बनाने पर झोंक दिये। इससे पाकिस्तानी की अर्थव्यवस्था का तबाह होना लाजमी था । पाकिस्तान अपनी ही नीतियों के कारण आज फटेहाल है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की उन्नति के लिए फौरन दो सूत्री नीति अपनानी चाहिए। पहले तो उसे भारत के खिलाफ सभी तरह की आतंकवादी गतिविधियों को मदद बंद कर दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा अपने देश में सेना और पुलिस के अलावा हर व्यक्ति से हथियार वापस ले लेने चाहिए। इससे देश में तालिबान सहित उग्रवादियों पर लगाम कस जायेगी।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के प्राध्यापक तुलसीदास ने कहा कि जिन्ना को सपनों में भी तालिबानाी पाकिस्तान की उम्मीद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा विरोधाभास जिन्ना के व्यक्तित्व और सिद्धांतों का विरोधाभास है क्योंकि वह निजी जिंदगी में धर्मनिरपेक्ष थे और उन्होंने धार्मिक आधार पर पाकिस्तान का गठन करवाया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सारी राजनीति भारत विरोध पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी राजनीति में भारत के उग्र विरोध के कारण ही वहां कट्टरता को बढ़ावा मिला। यह स्थिति जहां धार्मिक संगठनों के लिए लाभप्रद रही, वहीं सेना ने भी इसको परोक्ष रूप से समर्थन दिया।

प्रो़ तुलसीदास ने कहा कि पाकिस्तान के गठन से लेकर आज तक उसमें आधुनिक राज्य के बुनियादी तत्व दिखायी नहीं पड़े। पड़ोसी देश में हमेशा लोकतंत्र और सैन्य तानाशाही का दौर एक के बाद एक चलता रहा। उस देश की जनता बीच में लोकतांत्रिक सरकारों के विरूद्ध भी सड़कों पर उतर आती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लोकतंत्र एवं विकास की राह पर लाने के लिए सबसे जरूरी है वहां उग्रवाद और कट्टरवाद पर लगाम कसी जाये।

ज्ञातव्य है कि जिन्ना ने पाकिस्तान की स्वाधीनता के अगले दिन राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में स्पष्ट तौर पर यह कहा था कि पाकिस्तान जाति एवं धर्म का भेदभाव किये बिना शांति एवं सौहाद्र्र से रहे। उन्होंने विश्व शांति के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए कहा था कि पाकिस्तान की किसी के भी खिलाफ आक्रमण की मंशा नहीं होगी। जिन्ना ने अपने इस भाषण में यह भी स्पष्ट तौर पर कहा था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हितों की पूरी सुरक्षा की जायेगी।

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