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दो टूक

लोगबाग अस्पताल में दर्द के इलाज के लिए जाते हैं। लेकिन कभी-कभी वहां से दर्द लेकर लौटते हैं। लोनी हाजीपुर बेहटा में रहने वाली चित्रा की कहानी राजधानी के अस्पतालों में पसरी लापरवाही की एक और बानगी है। चित्रा का 15 दिन का बच्च मंगलवार सुबह स्वामी दयानंद अस्पताल से चोरी हो गया। एक संदिग्ध सी दिखने वाली औरत ने यह कारनामा कर दिखाया। सबके सामने वह बच्च लेकर छूमंतर हो गई।

अस्पताल से बच्चों के अपहरण या चोरी का पहला मामला नहीं है। जिस तरह इन अस्पतालों में दवा कंपनियों के सेल्समैन बेखटके बेखौफ घुसे चले आते हैं, उसी तरह चोर, गिरहकट और बलात्कारियों के लिए भी उनके दरवाजे खुले रहते हैं। महंगी फीस के बावजूद मरीजों और उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा के इंतजाम से मुंह मोड़ने वाले प्रबंधक क्या सीसीटीवी जैसे आसानी से सुलभ होने वाले सुरक्षा उपकरण तक नहीं खरीद सकते?

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