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स्वाइन फ्लू उम्मीदें अब टीके पर

‘एच1एन1’ यानी स्वाइन फ्लू ने पूरे देश को एक तरह से दहशत में ला दिया है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के तमाम सरकारी दावों के बावजूद, स्कूली बच्चों समेत आम लोग न केवल इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं, बल्कि कुछ मौतें भी हो चुकी हैं। जहिर है, देश में इस बीमारी के घर कर जाने के बाद अब इससे बचाव का टीका तैयार करने की सुध ली गई है। इसकी तैयारियों के बारे में बता रहे हैं मदन जैड़ा 

डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार स्वाइन फ्लू से अगले दो सालों में दुनिया की दो अरब आबादी संक्रमित होगी। विश्व की आबादी करीब छह अरब है। दूसरे शब्दों में इसका मतलब यह है कि भारत में एक-तिहाई आबादी यानी 35 करोड़ लोगों को इसका संक्रमण हो सकता है। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इस संभावित खतरे को स्वाइन फ्लू के टीके से काफी हद तक सीमित किया जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि टीका अभी तैयार नहीं है। अब इस बीमारी का संक्रमण कितना कम हो पाएगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि टीका कितनी जल्दी उपलब्ध हो पाता है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डा. वी. एम. कटोच के अनुसार विश्व के तमाम देशों समेत भारत में भी इसके लिए टीके को जल्दी बाजार में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार हमारी तीन कंपनियां सीरम इंस्टीट्यूट, भारत बायोटैक और पैनाशिया बायोटैक टीका लगभग तैयार कर चुकी हैं। इनमें से एक कंपनी एनिमल ट्रायल शुरू कर चुकी है, जबकि दुनिया में ग्लेक्सोस्मिथ, स्नोफी एवेंटिस, नोवार्टिस, सीएसएल जैसी मशहूर कंपनियां टीका बनाने में हमसे काफी आगे हैं। वे कुछ आगे मानवीय परीक्षणों तक पहुंच चुकी हैं।

दरअसल, इन कंपनियों को पहले से फ्लू का टीका बनाने का अनुभव है जबकि हमारी देशी कंपनियों ने कभी फ्लू का टीका नहीं बनाया। स्वाइन फ्लू का जो टीका बन रहा है, वह फ्लू के टीके को ही संशोधित करके बनाया जा रहा है। चूंकि ये कंपनियां फ्लू का टीका पहले से बनाती आई हैं इसलिए उन्हें सीमित परीक्षणों के बाद फास्ट ट्रैक मंजूरी देकर टीके को बाजार में उतारने की कवायद हो रही है। यदि ऐसा होता है तो भारत भी यही प्रक्रिया अपनाएगा।

इस बीच, केंद्र सरकार ने कहा है कि यदि विदेशों में टीका पहले बन जाता है तो कम से कम हम अपने स्वास्थ्य कार्मिकों के लिए उसकी खरीद करेंगे क्योंकि सबसे ज्यादा खतरा उपचार में जुटे कार्मिकों को है। लेकिन इसमें भी दिक्कत यह है कि इन कंपनियों के पास विकसित देशों से अभी से इतने आर्डर जा चुके हैं कि उन्हें पूरा करने में उन्हें कम से कम एक साल लगेगा। बहरहाल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी अब इन कंपनियों को टीके का आर्डर देने की तैयारी में हैं।

ड्रग कंट्रोलर जनरल सुरेंद्र सिंह के अनुसार स्वाइन फ्लू का टीका कितना प्रभावी होगा या इसकी कीमत कितनी होगी, यह टीका बनने के बाद ही तय होगा। लेकिन टीका ही एकमात्र जरिया है जो इस बीमारी के व्यापक फैलाव को रोक सकता है। इस समय यदि टीका उपलब्ध होता तो इसका फैलाव अभी भी रोका जा सकता था। इसके लिए सभी लोगों को टीका लगाने की जरूरत नहीं होती है बल्कि जिस क्षेत्र में बड़े स्तर पर बीमारी फैली है, वहां स्वस्थ लोगों को टीका लगा दिया जाए तो उसके आगे संक्रमण को सीमित किया जा सकता है। इस समय पुणे, दिल्ली और मुंबई में बीमारी बेकाबू है, यहां टीकाकरण करने से इसके फैलाव को अन्य शहरों में बढ़ने से रोका जा सकता है। यदि टीका आ जाता है तो यही रणनीति अपनानी होगी।

सामान्य एन्फ्लुएंजा (फ्लू) के टीके दुनिया में उपलब्ध हैं। ये दो साल तक प्रभावी होते हैं। टीकाकरण के एक पखवाड़े के भीतर ये टीका एच1 एन1 वायरस के खिलाफ संरक्षण प्रदान करना शुरू कर देता है। वैसे, विश्व स्वास्थ्य संगठन टीका बनाने की प्रक्रिया को मॉनीटर कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि टीका बनने के बाद संगठन के हस्तक्षेप से भारत जैसे तमाम विकासशील देशों को उचित कीमत पर बारी से पहले टीका हासिल हो सकता है क्योंकि घनी आबादी के कारण भारत बीमारी के फैलाव के लिए कहीं ज्यादा संवेदनशील राष्ट्र है।

एच1एन1 से बचाव और सुरक्षा के लिए गाइडलाइंस

क्या करें
-भीड़-भाड़ भरे स्थानों पर कम समय बिताएं
- पर्याप्त नींद लें, पोषक तत्व खाएं, खुद को शारीरिक रूप से एक्टिव रखें।
-हाथों को साबुन या एल्कोहल आधारित हैंड रब से धोएं, खासतौर पर नाक और मुंह को छूने के बाद।
-अगर आप किसी बीमार व्यक्ति की तीमारदारी कर रहे हैं, तो मास्क जरूर पहनें।

अगर लगे कि आप बीमार हैं तो-
-बिना किसी चिकित्सीय सहायता के आप मौसमी फ्लू और  एच1एन1 में अंतर नहीं कर सकते। अगर इस तरह के लक्षण हैं तो गौर करें- बुखार, कफ, सिरदर्द, बदन दर्द, गले में दर्द, नाक बहना। ध्यान रखने वाली बात है कि स्वाइन फ्लू की पुष्टि प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही की जा सकती है।
-अगर आपको सांस कम आ रही है या सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है, तो फौरन चिकित्सक  से संपर्क करें।
-अगर आपको तीन दिन से ज्यादा से बुखार आ रहा है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
-बच्चों की सांस तेजी से चल रही हो, लगातार बुखार आ रहा हो। ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें।

मास्क का ऐसे करें इस्तेमाल
-मास्क इस तरह पहने कि यह आपके मुंह और नाक को कवर करता है। चेहरे और मास्क के बीच में गैप कम से कम हो।
-जब कभी आप मास्क को छुए, तब आप अपने हाथों को साबुन या एल्कोहल आधारित हैंड रब से धोएं।
-जब आप मास्क खराब होने लगे, तो उसे बदलने में लेट-लतीफी न करें।
-एक मास्क का बार-बार इस्तेमाल न करें।

अगर उपरोक्त लक्षण हैं तो -
-घर पर ही रहे। स्कूल, भीड़-भाड़ भरी जगहों  से दूर रहें।
-आराम करें और ज्यादा से ज्यादा द्रव्य लें।
-सांस लेते वक्त या कफ के दौरान नाक को कवर कर लें। अगर आप टिश्यू का इस्तेमाल करते हैं, तो उसे फेंकते वक्त पूरी एहतियात बरते। अपने हाथों को साबुन से धोएं।
-अगर आपके पास टिश्यू पेपर नहीं है, तो आप इसे आस्तीन से ढक लें।
-मास्क का इस्तेमाल करने से अन्य लोगों में ये संक्रमण नहीं फैलता।
-दोस्तों और परिवार वालों को इस बीमारी के बारे में जानकारी दें।
-जांच कराने से पहले किसी हेल्थ प्रोफेशनल से इस बात की सलाह जरूर ले लें कि क्या जांच करानी अनिवार्य है।

इनसे बचें
- मुंह और नाक को न छुएं।
-ऐसे व्यक्ति के निकट संपर्क में न आएं, जिसमें आपको इंफ्लूएंज सदृश लक्षण दिखते हो। उस व्यक्ति से आप तकरीबन एक मीटर की दूरी बनाकर रखें।
-बिना किसी चिकित्सीय सलाह के एंटीवायरल जैसे कि टेमीफ्लू न लें।
-अकारण मास्क न पहनें
-मास्क का सही तरीके से इस्तेमाल न करने से संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है

स्रोत : डब्लयूएचओ

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