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कंपनी में निवेश

निवेश के लिए कंपनियां चुनने के दौरान मार्केट कैप, ट्रेडिंग वॉल्यूम के अलावा कुछ प्रमुख बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

कैश फ्लो जनरेट
इस पर गौर करना जरूरी है कि क्या कंपनी लगातार कैश फ्लो जेनरेट कर रही है ? तेजी से बढ़ती हुई कंपनियां बिना कैश जेनरेट किए फायदा दिखाती है। यह कंपनियां विस्तारीकरण की अवस्था में होती है। अंत में वह कैश जेनरेट करती है। जिन कंपनियों का कैश फ्लो निगेटिव होता है, वह अतिरिक्त पूंजी की खोज में होती है। वह इसे डेट या इक्विटी द्वारा प्राप्त करने की कोशिश करती है। डेट जहां रिस्क को बढ़ाता है, तो इक्विटी आय में तरलता लाती है। जिसका असर शेयर के दामों में देखने को मिलता है।

ऑपरेटिंग प्रॉफिट
क्या कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट है? कभी-कभी कंपनियां शुरुआती अवस्था में इक्विटी मार्केट के मार्फत पैसा एकत्रित करती है और इस बात की उम्मीद रखती है कि बाद में होने वाले फायदे के द्वारा वह इसकी पूर्ति कर लेगी। वास्तविकता में वह ऐसी स्थिति में होती है, जब वह प्लांट स्थापित करने, शोध और विकास करने के लिए पैसा खर्च करती है। हालांकि सुनने में तो यह अच्छा लगता है, लेकिन वास्तव में यह जोखिम भरा होता है। ऐसे में अच्छा यही होगा कि इन कंपनियों में निवेश से बचें। नए प्रोजेक्ट में कई तरह के रेगुलेटरी सत्यापन कराने पड़ते हैं, जिसकी वजह से काम में देरी भी हो सकती है। ऐसे में इन कंपनियों के स्टॉक में कभी भी आश्चर्य जनक परिवर्तन हो सकता है।

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