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सर्व शिक्षा अभियान की पुस्तकों में अद्भुत जानकारी

 ‘विधान परिषद का चुनाव पांच वर्षो में होता है’- जी हां यही जानकारी कक्षा एक और दो के बच्चों को दी जा रही है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत  इन कक्षाओं के लिए चयनित पुस्तकों में न केवल गलतियों की भरमार है बल्कि उन्हें ऐसे-ऐसे शब्दों की जानकारी दी गई है जिन्हें समझने के लिए शिक्षक भी सिर खुजलाते रह जाएंगे। ऐसे बच्चों को 60-60 शब्दों की एक-एक पंक्ति पढ़ाई जा रही है, जिसे दर्जन बार दोहराने के बाद भी बड़े-बड़े समझ नहीं सकते।

बच्चों को मजे से भूत-प्रेत की भी शिक्षा दी गई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जापानी कविता का एक संग्रह भी बच्चों को पढ़ना है जिसका नाम है-‘आपके जापानी हाइकू।’ इनमें सौ-सौ साल पुरानी कविताएं संग्रहित हैं। मजेदार बात यह है कि पुस्तक में जापानी लिपि में कवियों के नाम भी अंकित हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक स्कूलों के लिए खरीदी गई पुस्तकों में गड़बड़ी की जांच के लिए गठित बिहार विधान परिषद की विशेष कमेटी ने जांच के क्रम में ऐसी ही गलतियां पाई हैं।

कमेटी ने स्पष्ट कहा है कि प्राथमिक कक्षा के बच्चों के भविष्य के साथ आपराधिक लापरवाही बरती गई है। बासुदेव सिंह की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने कहा है कि पूरे मामले में आर्थिक भ्रष्टाचार लक्षित हो रहा है। कमेटी में रामवचन राय, केदार पांडेय, रामकिशोर सिंह और प्रेम कुमार मणि शामिल हैं। कमेटी ने पूरे मामले में कार्रवाई करने की अनुशंसा भी की है।

पुस्तकों के मामले में भारी गड़बड़ियां उजागर हुई है और वे कहीं से कक्षा एक और दो कक्षा के बच्चों के लिए नहीं है। पुस्तकें पूरी तरह विदेशी कलेवर और पात्रों वाली है और उन पर फोटो भी विदेशी बच्चों के हैं। एक जगह बताई गई है,‘ तितलियां एक बार में सैकड़ों अंडे देती हैं। उनमें से कैटर पिलर निकलता है।

इसी तरह ‘समुद्री कछुए के चार फ्लिपर्स होते हैं’ अब उतने छोटे बच्चों को कौन बताए कि यह कैटर पिलर या फ्लिपर्स क्या है? एक किताब है-‘नाना-नानी’ और इसका मतलब है नाना (छोटा) और नानी (छोटी) और यह गुजराती और मालवी भाषा का शब्द है, जिसे बिहार के बच्चों को पढ़ना है।

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  • Web Title:‘विधान परिषद का चुनाव पांच वर्षो में होता है’