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फ्लू के खिलाफ मुहिम में निजी अस्पताल भी होंगे

देश में स्वाइन फ्लू से तीन और मौतों के बाद अब तक इस बीमारी से मरने वालों की संख्या सात होने के साथ ही सरकार ने  एच1एन1 वायरस से लड़ाई में प्राइवेट अस्पतालों को भी शामिल करने का विचार बना लिया है। फ्लू ने सोमवार को पुणे में एक डॉक्टर और एक फार्मेसिस्ट की जान ले ली, जबकि चेन्नई में पहला शिकार एक साढ़े चार वर्षीय बच्चा बना। इस बीच, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हस्तक्षेप के बाद फ्लू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय केंद्र से 35-40 वरिष्ठ नौकरशाहों (संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव) को स्वाइन फ्लू से निपटने के इंतजामों की निगरानी के लिए राज्यों में भेजेगा। पुणे में सोमवार को आयुर्वेद के डॉ. बाबा साहेब माने (35) और एक 35 वर्षीय फार्मेसिस्ट संजय तिलेकर की मौत हो गई। पुणे में अब तक स्वाइन फ्लू से चार लोगों की मौत हो चुकी है। सैसून अस्पताल के डीन अरुण जामकर ने बताया कि बाबासाहेब माने को जब 7 अगस्त को एक निजी अस्पताल से यहां लाया गया तो उनके दोनों फेफड़ों में निमोनिया था और वह सांस नहीं ले पा रहे थे।

चेन्नई में साढे¸ चार वर्षीय बच्चे बी. संजय ने विभिन्न अंगों के काम करना बंद कर देने के बाद दम तोड़ दिया। यह बच्चा दमा से भी पीड़ित था। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि रविवार को उसकी हालत बिगड़ने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। संजय का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया कि बच्चे को गंभीर हालत में शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शनिवार को नमूना लिए जाने के बाद स्वाइन फ्लू से पीड़ित पाया गया था।

इधर दिल्ली में कैबिनेट सचिव के.एम. चंद्रशेखर की मौजूदगी में हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कई अहम फैसले लिए। बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों से अधिकारियों को लेकर उन्हें ट्रेनिंग देगा और उसके बाद उन्हें राज्यों में भेजा जाएगा।

अगले एक-दो दिनों में यह कार्य कर लिया जाएगा। ये अधिकारी राज्यों में निजी प्रयोगशालाओं, अस्पतालों को केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार इलाज की व्यवस्था पर नजर रखेंगे। साथ ही सरकारी अस्पतालों में वार्ड और अन्य जरूरी सुविधाओं का जायजा लेंगे। आजाद ने एक बात और साफ की। उन्होंने कहा अब राज्यों को भी अपने प्रयास तेज कर देने चाहिए। वे सिर्फ केंद्र के भरोसे नहीं रहें। उन्होंने यह भी बताया कि डब्ल्यूएचओं के प्रोजेक्शन के अनुसार अगले दो सालों के दौरान स्वाइन फ्लू से 33 फीसदी आबादी संक्रमित हो सकती है।

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