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कह दो मन की बातें

कह दो मन की बातें

कई दिनों से अजीत असमंजस की स्थिति में था। हालांकि उसे पता चल गया था कि उसके पड़ोस में आए नए किराएदार जॉन डिसूजा आईटी कंपनी में काम करते हैं और जॉब के मामले में वे उसकी मदद कर सकते हैं, पर वह उनसे कहने में हिचक रहा था। आखिरकार अजीत की मां ने एक दिन उनसे इस बाबत बात कर ही डाली। आज अजीत उनकी मदद और अपनी मेहनत की बदौलत कंप्यूटर शॉप चला रहा है। अब यदि इसकी चर्चा ही डिसूजा से नहीं होती तो संभव है अजीत आज भी किसी नौकरी के लिए धक्के खा रहा होता।

कुछ ऐसा ही मामला फूलों के कारोबारी आदित्य सिंह का है। जिस अल्पना के आज वह पति हैं, उसी से अपने दिल की बात कहने में उन्होंने वर्षो लगा दिए थे। यह तो उनकी खुशनसीबी थी कि इस बीच अल्पना ने किसी और को दिल नहीं दिया और न ही उसका रिश्ता कहीं और तय हुआ। बाद में दोस्तों के समझने पर आदित्य ने हिम्मत की और फिर उन्हें वह मिल गया, जिसके बारे में वह अक्सर सपने देखा करते थे।

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि लोग चाहते हुए भी अपने दिल की बातें नहीं कह पाते और ऐसे में कई अच्छे मौके गवां बैठते हैं। इस संबंध में मनोविज्ञानी अरविंद मिश्रा कहते हैं, ‘अंतमरुखी व्यक्ति अपनी बात कहने में हिचकते हैं। इसके अलावा इसमें वे लोग भी शामिल होते हैं, जिन्हें ना सुनना अच्छा नहीं लगता, यानी वे असफलता से भयभीत रहते हैं।’  कोई शक नहीं कि आज का माहौल मार्केटिंग का है। ऐसे में खुद को दूसरों के सामने बेहतर ढंग से पेश करने के बाद ही किसी वांछित परिणाम की आशा की जा सकती है। यही मार्केटिंग का मूलमंत्र है। किसी भी काम में सफलता के लिए खुद की मार्केटिंग भी उसी तरह जरूरी है, जैसे किसी प्रोडक्ट की। ऐसे में मन की बात दूसरों के सामने प्रकट किए बगैर आपकी जिंदगी सही रास्ते पर नहीं चल सकती। ‘जब लोग आपके बारे में जान-समझ ही नहीं पाएंगे कि आपकी क्षमता क्या है और आप क्या चाहते हैं, तो फिर आपकी मदद कैसे की जा सकती है।’ कहते हैं अरविंद मिश्रा।

अपनी जिंदगी को, अपने लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने के लिए यदि आप किसी से कुछ कहना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखिए :

बेझिझक कह डालिए अपने मन की बात। बस इसके लिए उचित माहौल का इंतजार कीजिए।

आपको जो कुछ भी कहना है, उसकी एक रूपरेखा पहले से तैयार कर लीजिए, ताकि ऐन वक्त पर आप बोलने में लड़खड़ा न जाएं।

यह सोच कर परेशान न हों कि परिणाम क्या होगा। हमेशा किसी बात को लेकर तनाव में रहने से तो अच्छा है कि ‘हां’ या ‘ना’ के रूप में परिणाम सामने आ जाए।

कुछ मामले में आप अपने किसी नजदीकी व्यक्ति की मदद ले सकते हैं।

कुछ कहने में इतनी देर न लगा दें कि अवसर ही हाथ से निकल जाए।

 

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