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दो टूक

अखबारों में शोर है और टेलीविजन चैनलों पर तो बाकायदा हंगामा। हालांकि अभी तक तकरीबन एक हजार लोग स्वाइन फ्लू से संक्रमित हुए हैं और सात को छोड़कर बाकी सभी को बचा लिया गया है। लेकिन हंगामा थम नहीं रहा।

स्वाइन फ्लू से घातक तो इस देश में मलेरिया, टीबी और यहां तक कि अतिसार साबित हुए हैं। पर एक ऐसा रोग जिसका इलाज पूरी तरह उपलब्ध है उसका हव्वा भी ऐसे खड़ा किया गया है कि उसके आगे तो आतंकवाद भी कम खतरनाक लगने लगे। यह ठीक है कि जब तक हल्ला-हंगामा न हो तब तक सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगती, लेकिन ज्यादा हंगामा कहीं ‘भेड़िया आया’ वाली समस्या न पैदा करे, यह ध्यान रखना भी जरूरी है।

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