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आर्ट से भी निखरता है भविष्य

किसी भी कार्य में महारत हासिल करने के लिए सबसे पहले जरूरी है आपकी उस क्षेत्र में रुचि और उस क्षेत्र से जुड़ी तमाम बुनियादी जानकारियों का ज्ञान। आज हम ऐसे ही कुछ कलात्मक करियर क्षेत्रों के बारे जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनमें कलात्मकता के पुट के साथ बेहतर रोजगार की संभावनाएं भी मौजूद हैं।

कलात्मक व्यक्तियों के विषय में समझ जाता है कि मूडी होते हैं, सपनों में खोए रहते हैं, अपनी दुनिया में जीते हैं, अव्यावहारिक होते हैं आदि। संक्षेप में वे कुछ भी हो सकते हैं लेकिन यथार्थवादी नहीं। यह बहुत से लोगों के लिए सही है। अक्सर कुछ लोगों में इसके विपरीत भी स्वभाव होता है, विशेषताएं होती हैं और शौक होते हैं। यहां कलात्मक रुचि से सम्बंधित पांच करियर विकल्प के विषय में संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है। इनमें सभी के लिए फॉर्म और डिजाइन और स्वअभिव्यक्ति की योग्यता की जरूरत पड़ती है, लेकिन इन सभी करियर ऑप्शंस में प्रैक्टिकल और समस्याओं को हल करने वाली गतिविधियों की जरूरत भी पड़ती है। जो ऑप्शंस हैं वे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं, लेकिन उनमें जो कॉमन हैं वह यह कि सभी के लिए पोस्टग्रेजुएशन का अध्ययन जरूरी है और निपुणता के लिए कुछ वर्षो तक ऑन जॉब ट्रे¨नग भी आवश्यक है।


ज्वेलरी डिजाइनर

ज्वेलरी डिजइनर को विभिन्न तरह के रत्नों के गुणों की जानकारी रखनी पड़ती है। आभूषण बनाने की तकनीक, डिजाइन के सिद्धांत तथा कलात्मक प्रतिभा का प्रयोग करना पड़ता है। स्केच करने, नापने, पुस्तकों से डिजाइन चुनने तथा ग्राहकों की मांग के अनुरूप अपनी प्रतिभा से मौलिक डिजाइन तैयार करने की जरूरत पड़ती है।

विस्तार से स्केच करने और मौलिक डिजाइन या वìकग मॉडल के आधार पर टेक्नीक या प्रोडक्ट्स की जानकारी देनी होती है। किस तरह के पत्थर इस्तेमाल होंगे, यह भी बताना पड़ता है। ज्वेलरी डिजाइनर बनने के लिए आपको किसी अच्छे प्राइवेट इंस्टीट्यूट से कोर्स करने की जरूरत होती है या फिर ‘निफ्ट’ से एक्सेसरी (सहायक) डिजाइन कोर्स कर लें।
12वीं पास करने के बाद 2-3 वर्ष की प्रोफेशनल शिक्षा या ट्रे¨नग लें।

शैक्षिक योग्यता : देश भर में कई संस्थान ज्वेलरी डिजइनिंग के डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कराते हैं। इन कोर्स को करने के लिए न्यूनतम शक्षिक योग्यता बारहवीं किसी भी संकाय से उत्तीर्ण होना चाहिए।

महत्वपूर्ण जानकारी आवश्यक : डिजाइन, उपभोक्ता के व्यवहार को समझने के लिए सेल्स और मार्के¨टग की समझ,
स्केचिंग, प्रोडक्शन प्रोसे¨सग की तकनीक की जानकारी।

प्रोफेशनल लाइफ : बहुत से ज्वेलरी डिजाइनर्स स्वयं ज्वेलरी का काम करते हैं, सुझाव देते हैं या फ्रीलां¨सग करते हैं। कुछ को बड़े ज्वेलर्स नौकरी दे देते हैं और कुछ ज्वेलरी का निर्यात करते हैं लेकिन शुरुआती स्तर पर ये सलाह दी जाती है कि आप खुद का काम शुरू न कर किसी फर्म या कंपनी में नौकरी कर अनुभव अíजत करें।

संभावनाएं : यह क्षेत्र बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन भारतीय महिलाओं और पुरुषों का ज्वेलरी के प्रति प्रेम, ब्रांडेड ज्वेलरी की लोकप्रियता के प्रति आकर्षण और ज्वेलरी के बढ़ते निर्यात से इस क्षेत्र में टैलेंटेड व्यक्तियों के लिए अच्छा भविष्य है।

आíकटेक्ट

यह अपेक्षाकृत जाना-पहचाना प्रोफेशन है। आíकटेक्ट का मुख्य काम अपनी डिजाइन के ज्ञान के आधार पर बिल्डिंग बनाने के लिए योजना बनाना, डिजइन तथा अनुसंधान करना है। भवन निर्माण कार्य कैसे किया जाए, सामान की जरूरत आदि सब कार्य भवन निर्माण के नियमों के तहत करने होते हैं।

आíकटेक्ट्स पहले क्लाइंट के व्यावहारिक पक्ष को समझता है, फिर स्थान के विषय में पता करता है। उसके बाद भवन निर्माण संबंधी डिजाइन तैयार करता है। किस तरह के सामान उपयोग में लाए जाएंगे, रंग, फि¨टग, अनुमानित लागत और समय, यह सब तैयार करता है।

जब क्लाइंट आíकटेक्ट की योजना और लागत से सहमत हो जाता है तब वह स्केल ड्रॉइंग और इंजीनियर, कांट्रैक्र्ट्स के लिए कांट्रैक्ट पेपर तैयार करता है। वह क्लाइंट की तरफ से निर्माण स्थान देखता है कि कार्य योजनानुसार हो रहा है या नहीं।

आíकटेक्ट बनने के लिए 10+2 के बाद कम से कम पांच वर्ष का कोर्स करना पड़ता है। कोर्स साइंस (जीसीएम) तक सीमित है। कोर्स कठिन है और इंजीनियरिंग की तरह मेहनत करनी पड़ती है। कई मशहूर और सम्मानित आíकटेक्चर कॉलेज हैं जहां यह कोर्स किया जा सकता है।

जानकारी के महत्वपूर्ण क्षेत्र : डिजाइन, निर्माण के लिए सामान और तकनीक, प्रशासन और प्रबंधन। आíकटेक्ट को गणित की जानकारी, समन्वय, नए आइडिया और योजना को सही ढंग से लागू करना आना चाहिए।

प्रोफेशनल लाइफ : बहुत से आíकटेक्ट्स स्वयं प्रैक्टिस करते हैं या फिर छोटे ग्रुप में।

दृष्टिकोण : आजकल आíकटेक्ट्स की आवश्यकता कम हो गई है। कई आíकटेक्ट्स ने अपना ध्यान इंटीरियर डिजाइन, एक्सस्हीविशन डिजाइन और फर्नीचर निर्माण की ओर लगा दिया है, क्योंकि छोटी और स्वतंत्र बिल्डिंग्स ने बड़े पैमाने के बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स के लिए रास्ते खोल दिए हैं। ये बड़े प्रोडेक्ट्स या तो स्थानीय सरकारें विकसित कर रही हैं या प्राइवेट बिल्डर्स।


सेट डिजाइनर 
(फिल्म, टेलीविजन)

सेट डिजाइनर फिल्म या टेलीविजन प्रोडक्शन सेट्स की डिजाइन करता है। सीन का इफेक्ट रंगमंच की शैली, स्केल ड्राइंग आदि तैयार करता है। वह प्रोडक्शन के आर्ट डायरेक्टर के साथ मिलकर कार्य करता है। इलस्ट्रेशन देखकर सेट की जरूरतों और डिजाइन की आइडिया के विषय में विचार करता है। मौजूदा दौर में जिस तेजी से मीडिया और मनोरंजन उद्योग का विस्तार हो रहा है, उससे सेट डिजाइनिंग के क्षेत्र में कई संभावनाएं बनी है।

कैसे पाएं प्रवेश

बहुत से डिजाइनर्स में यह प्रतिभा जन्मजात होती है, लेकिन यदि आप इस क्षेत्र में प्रोफेशनल बनना चाहते हैं तो 3/4 वर्ष का इंटीरियर डिजाइन का कोर्स कर लीजिए। देश के कुछ संस्थानों में यह कोर्स उपलब्ध है। अच्छा सेट डिजाइनर बनने के लिए डिजाइन, फाइनआर्ट्स, बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन की जानकारी जरूरी है।

सेट डिजाइनर के लिए सबसे अच्छी जगह भारत की विशाल फिल्म इंडस्ट्री है। फिल्म इंडस्ट्री में मिलकर संपर्क करना पड़ेगा और ब्रेक पाने के लिए समय का इंतजार करना पड़ेगा। टेलीविजन इंडस्ट्री के विकास से सेट डिजइनर्स के लिए अच्छा स्कोप है।


क्रिएटिव राइटर

मौलिक लेखन करें : जिस विषय में आपकी व्यक्तिगत दिलचस्पी हो उस पर लिखिए या प्रकाशकों से किसी विषय पर लेखन की अनुमति लेकर लिखें। अनुसंधान कीजिए, जो विचार आते हैं उनके नोट बनाएं, तथ्यात्मक सूचनाएं विकसित करें। जो विषय है उसे संयोजित कीजिए और किस तरह लिखना है, पर विचार करें या आउटलाइन तैयार करें। विषय चरित्र, प्लॉट विकसित कीजिए और स्टोरी लाइन तैयार करें। पांडुलिपि (मैनुस्क्रिप्ट) तैयार करें। फिर उसे समालोचनात्मक नजरिए से देखे, जो गलतियां हैं, उन्हें ठीक करें। जब आप आश्वस्त हो जाएं कि आपने जो लिखा है, ठीक है, तब प्रकाशन या ब्रांड कॉ¨स्टग के लिए भेजें। पांडुलिपि में परिवर्तन के लिए प्रकाशक/ब्रॉडकास्टर के प्रतिनिधि से बात कीजिए। एक से अधिक विषयों पर लिखें। यदि भाषा की मास्टर्स डिग्री है तो वह उपयोगी है। आजकल मास कम्युनिकेशन और रचनात्मक लेखन कोर्स भी उपलब्ध हैं। अभ्यास से भाषा की जानकारी अच्छी होगी और लेखन योग्यता बढ़ेगी। लेखन के अतिरिक्त, पढ़ना, चिंतन, अनुसंधानात्मक कार्य करना भी जरूरी है। विभिन्न मीडिया पर नजर और देखना कि वहां कार्य कैसे हो रहा है, उपयोगी साबित होता है।

संभावनाएं : इस क्षेत्र के बारे में अधिक नहीं कहा जा सकता। जहां अरुंधती राय जैसी लेखिका पैसा कमाती हैं, वहीं कुछ उतने भाग्यशाली नहीं होते। जानकारियों को ध्यान से पढ़ें और देखें किस में आपकी दिलचस्पी है। प.म


फिलोलॉजिस्ट

फिलोलॉजिस्ट किसी विशेष भाषा या कुछ भाषाओं की संरचना का अध्ययन करना है। वह अस्पष्ट भाषाओं को पहचानने तथा वर्गीकृत करने का काम करता है। वह अस्पष्ट भाषा आधुनिक भी हो सकती है और प्राचीन भी। प्राचीन सभ्यताओं के पुरातात्विक अवशेषों में प्राप्त गुप्त संकेतों में लिखी हुई प्राचीन भाषाओं को पढ़ना-समझना पड़ता है।

ये है जरूरी

फिलोलॉजिस्ट बनने के लिए कम से कम पोस्टग्रेजुएट डिग्री जरूरी है। कॉलेज, यूनिवíसटी तथा अनुसंधान संस्थानों में जॉब मिल सकती है। नये जॉब कम हैं। जब पुराने फिलोलॉजिस्ट रिटायर होते हैं तब जॉब खाली होती है।

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